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#KabTakNirbhaya : आरोपियों की हिरासत को लेकर पुलिस की याचिका पर सुनवाई आज

हैदराबाद में डॉक्टर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस ने आरोपियों की दस दिन की हिरासत को लेकर सोमवार को कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होगी। साइबराबाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों से हिरासत में पूछताछ किए जाने की जरूरत है, जिसके बाद हमने ताजा याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि वह तय समय में जांच पूरी कर लेंगे और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

उबली संसद, तत्काल फांसी के लिए कानून में बदलाव की मांग

हैदराबाद में पशु चिकित्सक से सामुहिक दुष्कर्म के बाद उसकी लाश को जला देने की दिल दहलाने वाली घटना पर संसद के दोनों सदनों में सांसदों का आक्रोश फूट पड़ा। सभी दलों के सांसदों ने एक स्वर में मौजूदा कानून में बदलाव ला कर या नया कानून बना कर दुष्कर्मियों को तत्काल मौत की सजा का प्रावधान करने की मांग की।

सपा सांसद जया बच्चन ने तो रेपिस्टों की पब्लिक लिंचिंग तक की मांग कर डाली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने निर्भया कांड के बाद कानून के कठोर बनाए जाने के बावजूद हालात में बदलाव न आने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि अगर संसद की भावना कठोर कानून बनाने की है तो सरकार इसके लिए तैयार है।

लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद सभी दलों के सदस्यों ने इस घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बीजेडी के पिनाकी मिश्रा, टीएमसी के सौगत राय, एनसीपी की सुप्रिया सुले, बसपा के दानिश अली, भाजपा की लॉकेट चटर्जी ने ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए कठोर संदेश देने पर बल दिया।

सभी सांसदों ने कहा कि अब दुष्कर्म के मामलों में कानून में संशोधन कर तत्काल मौत की सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए। इस दौरान ऐसे मामलों में पुलिस के रवैये पर सवाल उठे। कई सांसदों ने राज्य सरकार के रवैये की आलोचना की।

निर्भया मामले में देरी क्यों : पिनाकी मिश्रा

बीजेडी के पिनाकी मिश्रा ने कहा कि ऐसे मामलों में बढ़ोत्तरी के लिए व्यवस्था भी दोषी है। उन्होंने कहा कि निर्भया मामले में सात साल गुजर जाने के बावजूद दोषियों को मौत की सजा नहीं मिली। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। उन्होंने कहा कि अगर दोषी राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर नहीं करता है तो इसके लिए भी प्रावधान होना चाहिए।

महिला सुरक्षा पर सभी रहे विफल : अनुप्रिया

अपना दल की सांसद अनुप्रिया ने कहा कि संसद में हर बार इस तरह की घटना पर चर्चा होती है, आक्रोश व्यक्त किया जाता है, मगर हालात में सुधार के बदले स्थिति और बदतर हो जाती है। ऐसी घटनाओं से देश की भावना आहत होती हैं। पीड़िता के परिजनों को एफआईआर दर्ज करने में मशक्कत करनी पड़ी। सीएम को मामले में फास्ट ट्रैक गठन में तीन दिन का समय लग गया। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के सवाल पर सभी विफल हैं।

हम तैयार, संसद तय करे : राजनाथ

इस घटना से पूरा देश शर्मशार है। निर्भया कांड के बाद कठोर कानून बना था। हालांकि इसके बाद भी जघन्य कृत्य हो रहे हैं। जहां तक सांसदों की भावनाओं की बात है तो सरकार कठोर कानून बनाने केलिए तैयार है। संसद इस पर चर्चा करे। जिस प्रकार के कानून बनाने पर सहमति बनेगी सरकार वैसा ही कानून बनाने के लिए तैयार है।
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