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Today News//पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराने की तकनीक नहीं ढूंढ पा रहीं अमेरिका, कनाडा और इजरायल की कंपनियां

भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। पहले ये ड्रोन पंजाब से लगती सीमा में देखे गए, तो उसके बाद जम्मू और कश्मीर में भी ऐसी घटनाएं सामने आईं। अब राजस्थान सीमा पर भी ड्रोन देखे गए हैं। गृह मंत्रालय ने ड्रोन को मार गिराने वाली तकनीक खोजने के लिए कई कंपनियों से बातचीत की है। इनमें अमेरिका, कनाडा और इजराइल के अलावा कई स्वदेशी कंपनियां भी शामिल हैं। बीएसएफ सूत्रों के अनुसार, विभिन्न कंपनियों के प्रोजेक्ट देखे गए हैं, लेकिन कोई भी तय मापदंडों पर खरा नहीं उतर सका। सीमा सुरक्षा बल चाहता है कि कोई ऐसा उपकरण हो, जिसकी मदद से ड्रोन को तकनीकी तौर पर खत्म किया जा सके।

एनटीआरओ (राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन) और डीआरडीओ जैसे संगठनों को भी ड्रोन की जानकारी देने, उसे पकड़ने वाले रडार और मार गिराने वाला सिस्टम तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। ड्रोन को हथियार से मार गिराने की बजाए कोई ऐसा सिस्टम तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, जो ड्रोन के संचार सिस्टम को ही ठप कर सके।

जैसे ही कोई ड्रोन सीमा के निकट आए, वह उस सिस्टम की मदद से खुद जमीन पर आ गिरे। बीएसएफ के सूत्रों का कहना है कि हम ऐसा ही कोई सिस्टम विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। जब तक यह सिस्टम नहीं बन जाता, तब तक विभिन्न एजेंसियां ही ड्रोन पर नजर रखेंगी।

खुद लंबे समय तक रॉ में काम कर चुके बीएसएफ के डीजी विवेक जौहरी ड्रोन की स्थिति से निपटने के लिए पंजाब और जम्मू कश्मीर के उन क्षेत्रों में गए हैं, जहां पर कुछ समय पहले ड्रोन देखे जाने या गिराने के मामले सामने आए थे। बीएसएफ को रात में ड्रोन पर नजर रखने के लिए कौन से उपकरण मुहैया कराए जाएं, इन योजना पर भी काम हो रहा है।

दूसरी ओर पाकिस्तान ड्रोन की मदद से भारतीय सीमा में घातक हथियार, ड्रग्स और नकली करेंसी तक भेजने लगा है।

विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच ड्रोन को लेकर कुछ माह पहले तनातनी हो गई थी। यह नहीं स्पष्ट हो पा रहा था कि ड्रोन आने की जानकारी सबसे पहले किस एजेंसी के पास होनी चाहिए। अगर ड्रोन दिख रहा है, तो उसे जब्त करने या मार गिराने की जिम्मेदारी किसके पास है।

स्थानीय प्रशासन की ओर से कहा जाता है कि हमारी पुलिस के पास ऐसे कोई तकनीकी उपकरण नहीं है, जिससे कि ड्रोन को मार गिराया जा सके।

सीमावर्ती इलाकों का सिविल प्रशासन इसके लिए बीएसएफ को ही कह सकता है। दूसरी ओर बीएसएफ का यह कहना था कि ड्रोन को मार गिराने वाले पर्याप्त उपकरण हमारे पास नहीं हैं। ऐसे मामले में एयरफोर्स बेहतर कर सकती है।

इस मामले में जब एयरफोर्स से कहा गया तो उनका जवाब था कि ड्रोन ज्यादा ऊंचाई पर नहीं होते, इसलिए हमारा रडार वहां तक नहीं पहुंच सकता।

गृह मंत्रालय ने इन सब बातों को एक बड़ी लापरवाही मानते हुए विभिन्न एजेंसियों से जवाब तलब किया था। पाकिस्तान की ओर से भारतीय सीमा में अनेक ड्रोन आ चुके हैं। जिन इलाकों में ये ड्रोन देखे गए, वहां के स्थानीय लोगों ने भी इसकी पुष्टि की है। इनमें अनेक ड्रोन तो रात के समय आए हैं।

बीएसएफ के एक अधिकारी का कहना है कि दिन में ड्रोन जैसी कोई भी वस्तु दिखती है, तो हम अपने कंट्रोल रुम को सूचित कर देते हैं। अगर वहां से आदेश आता है, तो ड्रोन को मार गिराया जाता है।

हालांकि यह सब इतना आसान नहीं है। अगर ड्रोन पांच सौ मीटर से ऊपर है, तो उसे पकड़ पाना मुश्किल होता है। रात में हमारे पास ऐसा कोई उपकरण नहीं है, जिससे हम उसे देख सकें या गिराने में सफल हो जाएं। बीएसएफ के सूत्र बताते हैं कि हम कई कंपनियों के उपकरण देख रहे हैं।

उम्मीद है कि जल्द ही ड्रोन को मार गिराने वाला सिस्टम तैयार कर लिया जाएगा। तब तक सभी एजेंसियां अपने स्तर पर ड्रोन से निपटेंगी।