सीकर न्यूज़, Sikar News in Hindi, Sikar Local News

Today News//नासा ने मंगल पर जाने के लिए चुने 13 वैज्ञानिक, भारतीय मूल के राजा चारी भी शामिल

अमेरिका ने अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए 13 नए अंतरिक्ष यात्रियों को तैयार कर लिया है। इसमें 11 अमेरिकी जिसमें एक भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री राजा चारी और दो कनाडाई मूल के हैं। इसमें सात पुरुष और छह महिला अंतरिक्ष यात्री हैं। इस टीम में शामिल महिलाएं आर्टेमिश मिशन के तहत 2024 में चांद पर कदम रखेंगी जबकि 2030 में मंगल ग्रह पर इन्हीं अंतरिक्ष यात्रियों में से कोई पहली बार कदम रखेगा। शुक्रवार को अमेरिकी स्पेस एजेंसी जॉनसन स्पेस सेंटर में पहली बार भव्य ग्रैजुएशन सेरेमनी का आयोजन हुआ जिसमें इन सभी को दुनिया से रूबरू कराया गया।13 अंतरिक्ष यात्रियों का चयन 18 हजार से अधिक आए आवेदन में से हुआ है। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्राइडेनस्टाइन ने कहा कि ‘ये सभी अंतरिक्ष यात्री अपने काम से 2024 और 2030 के मिशन के आधार पर दुनिया को अपना लोहा मनवाएंगे’। सभी वैज्ञानिक अंतरिक्ष यान बनाने और अंतरिक्ष में मौजूद वैज्ञानिकों की मदद करेंगे। ये सभी लोग उन 500 अंतरिक्ष यात्रियों की चुनिंदा सूची में शामिल हैं जिन्हें भविष्य में अंतरिक्ष यात्रा पर जाने का मौका मिलेगा।

भारतीय मूल के पहले पुरुष अंतरिक्ष यात्री

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लिए वैसे तो कई भारतीय मूल के लोग काम करते हैं। लेकिन अंतरिक्ष यात्री के तौर पर भारतीय मूल की महिला वैज्ञानिकों ने सबसे पहले बाजी मारी थी। इसमें कल्पना चावला और सुनिता विलियम्स का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाता है। चारी भारतीय मूल के पहले पुरुष हैं जो नासा के लिए अंतरिक्ष यात्री के तौर पर काम करेंगे।

हैदराबाद के थे चारी के पिता

अंतरिक्ष वैज्ञानिक राजा चारी के पिता श्रीनिवास चारी हैदराबाद के रहने वाले थे। ओसमानिया यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वे 1970 के दशक में अमेरिका चले गए। मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद पेगी चारी से शादी की और 25 जून 1977 को राजा का जन्म हुआ। 67 साल की उम्र में 2010 में श्रीनिवास चारी का निधन हो गया।

एमआईटी से एयरोनॉटिक्स में डिग्री

राजा चारी ने यूएस एयरफोर्स एकेडमी से एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। इसके बाद मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स में मास्टर्स किया है। नेवी पायलट स्कूल से प्रशिक्षण ले चुके हैं। नासा में शामिल होने से पहले अमेरिकी एयरफोर्स में ले. कर्नल थे और 461 फलाइट टेस्ट स्कवार्डन के कमांडर जबकि एफ-35 इंटीग्रेटेड टेस्ट फोर्स के निदेशक भी रह चुके हैं।

दो साल तक चला प्रशिक्षण

तेरह वैज्ञानिकों का प्रशिक्षण करीब दो साल तक चला। इस दौरान सभी वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष की बारीकियों में बताने के साथ स्पेसवॉक, रोबोटिक्स और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन सिस्टम के बारे में जानकारी दी गई है। इसके अलावा टी-38 जेट और रुसी भाषा का प्रशिक्षण दिया गया है।

नासा के पास 48 अंतरिक्ष यात्री

नासा के पास अभी 48 अंतरिक्ष यात्री हैं जो पूरी तरह से सक्रिय हैं। नासा इस संख्या को बढ़ाने के लिए आने वाले समय में और आवेदन जारी कर सकता है। नासा की योजना अगले एक दशक में इस आंकड़े को सैकड़े में तब्दील करना है जिससे अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में तेजी लाई जा सके।