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Today News//रायसीना डायलॉग: अमेरिका-ईरान तनाव से जलवायु परिवर्तन के मुद्दे तक, जानें किसने क्या कहा

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  • तीन दिवसीय रायसीना डायलॉग का मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने आगाज किया
  • रायसीना डायलॉग के उद्घाटन सत्र में सात पूर्व राष्ट्र प्रमुखों ने साझा किए विचार
  • आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भारत को बताया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की ‘रणनीतिक धुरी’
  • भूटानी नेता तोग्बे ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के मामले में विफल

विस्तार

वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के लिए तीन दिवसीय रायसीना डायलॉग का मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगाज किया। पहले दिन सात पूर्व राष्ट्र प्रमुखों ने अमेरिका-ईरान तनाव, अफगानिस्तान में शांति के प्रयास और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।

 

उद्घाटन सत्र में डेनमार्क के पूर्व पीएम और नाटो के पूर्व महासचिव अनस रासमुसन ने दमनकारी शासकों और शासन के खिलाफ दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देशों से साथ खड़े होने के लिए गठजोड़ की वकालत की। पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में रासमुसन ने कहा कि इस गठबंधन की अगुवाई भारत को करनी चाहिए।

राममुसन ने कहा, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रशंसक हूं और भारत इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता। बता दें कि विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के साझा आयोजन में हो रहे रायसीना डायलॉग में 100 देशों के 700 प्रतिष्ठित लोग शामिल हो रहे हैं।

आस्ट्रेलियाई पीएम ने भेजा वीडियो संदेश पहले इस प्रतिष्ठित आयोजन में उद्घाटन भाषण देने वाले आस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन ने कार्यक्रम के लिए वीडियो संदेश भेजा। दरअसल, आस्ट्रेलिया में भीषण आग के चलते उनका भारत दौरा रद्द हो गया है। अपने संदेश में मॉरिसन ने कहा, भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की ‘रणनीतिक धुरी’ है। इंडो-पैसिफिक शब्द इस मान्यता को दर्शाता है कि भारत की शक्ति और उद्देश्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत ने हिंद महासागर में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है। भारत बहुध्रुवीय दुनिया का पैरोकार : जयशंकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारतीय विदेश नीति विभिन्न पक्षों के साथ व्यापक जुड़ाव की पक्षधर है। भारत वैश्विक अंतर्विरोधों का लाभ नहीं उठाता। हम बहुध्रुवीय दुनिया में अपने हितों को आगे बढ़ाते हुए दुनियाभर का अच्छा सोचते हैं। इन विश्व नेताओं ने किया मंथन उद्घाटन सत्र में रासमुसन, न्यूजीलैंड की पीएम हेलेन क्लार्क, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, कनाडा के पूर्व पीएम स्टीफन हार्पर, स्वीडन के पूर्व पीएम कार्ल ब्लिडट, भूटान के पूर्व पीएम शिरिंग तोग्बे, दक्षिण कोरिया के पूर्व पीएम हान सांग सू ने वैश्विक चुनौतियों पर मंथन किया। इन मुद्दों पर हुई पहले दिन चर्चा पहले दिन वैश्वीकरण के बाद दुनिया के सामने चुनौतियां, एजेंडा 2030, आधुनिक दुनिया में तकनीक का महत्व, जलवायु परिवर्तन पर चर्चा हुई।

ईरान में सरकार बदलना जरूरी : हार्पर उद्घाटन सत्र में ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या और उसके बाद अमेरिका-ईरान के बीच तनाव का मुद्दा उठा। पूर्व कनाडाई पीएम हार्पर ने कहा, जब तक ईरान की मौजूदा सरकार नहीं बदलती पश्चिम एशिया में शांति नहीं आ सकती। हार्पर ने कहा, उदार लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं अपने ही देश में विरोध का सामना कर रही हैं। मुझे लगता है कि उदार लोकतंत्रों की बड़ी ताकत यह है कि वे अक्सर गलत होते हैं लेकिन समय के साथ गलती सुधारते हैं। मोदी के नेतृत्व की सराहना हार्पर ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि भारत स्व-परिभाषित है। उन्होंने कहा कि भारत पश्चिमी उदारवादियों का गढ़ नहीं बनेगा। मौजूदा सरकार के नेतृत्व में देश अपनी पहचान तेजी से वापस पा रहा है। अमेरिका दबाव नहीं बना सकता : करजई करजई ने कहा कि अमेरिका को यह समझना चाहिए कि वह दूसरे को अपनी बात मानने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। अमेरिका अफगानिस्तान के साथ ऐसा नहीं कर सका, तो ईरान के साथ कैसे कर सकता है? अमेरिका को समझदारी दिखानी चाहिए। करजई ने अफगानिस्तान में शांति के लिए सरकार और तालिबान के बीच बातचीत की उम्मीद जताई।

वायु प्रदूषण वैश्विक समस्या : क्लार्क न्यूजीलैंड के पूर्व प्रमुख क्लार्क ने कहा, जलवायु परिवर्तन की चुनौती से मुकाबला करने के लिए कार्बन उत्सर्जन शून्य करना महत्वपूर्ण है। हालांकि इस बड़े लक्ष्य को पाने के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाना जरूरी है। क्लार्क ने वायु प्रदूषण को वैश्विक समस्या बताते हुए कहा कि कानूनी कार्रवाई, निवेश और सख्ती से ही इसे रोका जा सकता है। जलवायु परिवर्तन मामले में विफल रहा यूएन भूटानी नेता तोग्बे नेता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के मामले में विफल रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले में केवल एक प्रस्ताव पास किया है। इसमें बदलाव की जरूरी है, क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने कहा, भूटान इकलौता ऐसा देश है जो जितना कार्बन उत्सर्जित करता है, उससे अधिक खत्म कर रहा है। उन्होंने सांस लेने को मूल अधिकार बताया और कहा कि साफ हवा के जरिए यह अधिकार दिया जा सकता है।