320 km of city roads were dug to lay sewage line, but the restoration is zero… accidents are happening | सीवेज लाइन बिछाने के लिए खोद दीं शहर की 320 किमी सड़कें, लेकिन रेस्टोरेशन जीरो… हो रहे हादसे


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भोपालएक घंटा पहले

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कोलार रोड की ऐसी हालत है - Dainik Bhaskar

कोलार रोड की ऐसी हालत है

शहर में सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिए 500 करोड़ रुपए से 3 अलग-अलग काम चल रहे हैं, जो गुजरात की अंकिता कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है। पूरे शहर में 395.60 किमी सड़कें खोदी जा रही हैं। इसमें से 80% यानी लगभग 320 किमी सड़कें अब तक खोदी जा चुकी हैं, लेकिन रेस्टोरेशन जीरो। अकेले कोलार क्षेत्र में 135 करोड़ रुपए से 138 किमी लंबा सीवेज नेटवर्क बिछाया जा रहा है। पिछले 3 साल में जहां-जहां भी सीवेज लाइन के लिए सड़क खुदी है, वहां से गुजरना मुश्किल है।

रविवार शाम को ऐसी ही जर्जर सड़क पर डंपर से टक्कर में महिला की मौत हो गई। जिस सड़क पर महिला की मौत हुई वह बावड़ियाकलां को कोलार रोड से जोड़ती है और इस सड़क की हालत यह है कि यहां गड्ढों के बीच वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। केवल यही सड़क नहीं पूरे कोलार में कोई कॉलोनी और कोई गली ऐसी नहीं है, जहां मेन रोड से लेकर गलियों तक की सड़कें खोदी नहीं गई हैं। स्थिति यह है कि मामूली बारिश में ही यहां वाहन फिसलने लगते हैं। कोलार के साथ बावड़ियाकलां और शाहपुरा इलाके में हालात सबसे ज्यादा खराब है।

20 प्रतिशत बजट होता है रेस्टोरेशन का
मोटे तौर पर किसी भी प्रोजेक्ट में लगभग 20% बजट रेस्टोरेशन पर खर्च होता है। इस हिसाब से 500 करोड़ में से 100 करोड़ सड़कों को ठीक करने पर खर्च होना चाहिए, लेकिन जिस तरह से रेस्टोरेशन हो रहा है, उसे देखकर कोई भी कह सकता है कि सिर्फ लीपापोती ही की जा रही है।

खुदाई के साथ-साथ होना चाहिए रेस्टोरेशन
नगर निगम कमिश्नर वीएस चौधरी कोलसानी कई बार यह कह चुके हैं कि खुदाई के साथ-साथ ही रेस्टोरेशन होना चाहिए, लेकिन कंपनी रेस्टोरेशन के नाम पर केवल मुरम भरकर आगे बढ़ जाती है। जितनी कॉलोनियों में आज तक सीवेज लाइन बिछी है, सभी जगह हालात यह है कि बरसात में घर से वाहन निकालना मुश्किल हो जाता है।

जहां दुर्घटना हुई वह स्थान हमारे काम से चार मीटर दूर
जहां रविवार को दुर्घटना हुई, वह स्थान हमारे काम से 4 मीटर दूर है। और वहां हमारा रेस्टोरेशन हो चुका है, सड़क मोटरेबल है। हम साथ-साथ में रेस्टोरेशन कर रहे हैं।
-विपुल पटेल, प्रोजेक्ट इंचार्ज, अंकिता कंस्ट्रक्शंस

रेस्टोरेशन में कमियों की वजह से दुर्घटना हुईं, हम सुधार कराएंगे
रेस्टोरेशन में कमी के कारण ही रविवार को दुर्घटना हुई है। पूरे शहर में कई जगहों पर सड़कों की स्थिति खराब है। हम कंपनी से सुधार कराएंगे।
– वीएस चौधरी कोलसानी, कमिश्नर, नगर निगम

एनजीटी ने कहा- भले ही नाला न हो, तब भी पानी के प्राकृतिक बहाव में कोई बाधा न पैदा की जाए
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने टीटी नगर के नाला विवाद के मामले में कहा है कि यदि कोई सार्वजनिक जमीन या जल निकासी व्यवस्था पानी के प्राकृतिक और मुक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर रही है, तो प्राकृतिक जल के मुक्त प्रवाह में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि नाला होने या नहीं होने पर एनजीटी अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है। गौरतलब है कि यहां स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से कर्मचारियों के आवास के लिए 6 बहुमंजिला टॉवर का निर्माण किया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन टॉवर के निर्माण के लिए यहां एक पुराने नाले को पाटकर उसे डायवर्ट कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी कंपनी कुछ पुराने रिकॉर्ड तलब किए हैं। याची पक्षकार विजित पाटनी की ओर से निगम और प्रदूषण बोर्ड की निरीक्षण रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।

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