Air India Disinvestment; Tata Group Bids To Buy Air India Airlines | टाटा ग्रुप ने एअर इंडिया को खरीदने के लिए लगाई बोली, आज बोली लगाने का अंतिम दिन


मुंबईएक मिनट पहले

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करीबन 68 साल बाद एअर इंडिया एक बार फिर से घर वापसी करेगी। खबर है कि टाटा ग्रुप ने एअर इंडिया को खरीदने के लिए बोली लगाई है। बोली लगाने की आज अंतिम तारीख थी। एअर इंडिया पहले टाटा ग्रुप के पास ही थी। विनिवेश विभाग (Department of Investment and Public Asset Management) ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी है।

इस डील के तहत एअर इंडिया का मुंबई में स्थित हेड ऑफिस और दिल्ली का एयरलाइंस हाउस भी शामिल है। मुंबई के इसके ऑफिस का मार्केट वैल्यू 1,500 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। वर्तमान में एअर इंडिया देश में 4400 और विदेशों में 1800 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट को कंट्रोल करती है।

भारी-भरकम कर्ज से दबी है कंपनी

भारी-भरकम कर्ज से दबी एअर इंडिया को कई सालों से बेचने की योजना में सरकार फेल रही। सरकार ने 2018 में 76% हिस्सेदारी बेचने के लिए बोली मंगाई थी। हालांकि उस समय सरकार मैनेजमेंट कंट्रोल अपने पास रखने की बात कही थी। जब इसमें किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई तो सरकार ने मैनेजमेंट कंट्रोल के साथ इसे 100% बेचने का फैसला किया। हाल में विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि 15 सितंबर के बाद बोली लगाने की तारीख नहीं बढ़ाई जाएगी।

स्वामी ने नीलामी प्रक्रिया में लगाया धांधली का आरोप

उधर भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने इसे हफ्ते सोशल मीडिया पर कहा था कि एअर इंडिया की नीलामी की प्रक्रिया में धांधली हो रही है। इसके खिलाफ उन्होंने कोर्ट जाने की बात कही थी। स्वामी ने नीलामी की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना था कि स्पाइसजेट खुद फाइनेंशियल समस्याओं से घिरी हुई कंपनी है और ऐसे में वह बोली लगाने की अधिकारी नहीं है। उन्होंने टाटा को भी अयोग्य बताया। कहा कि एअर एशिया के मामले में टाटा संकट में है और कोर्ट में मामला भी उस पर है।

2007 से लगातार घाटे में है कंपनी

एअर इंडिया 2007 में इंडियन एयरलाइंस में विलय के बाद से कभी नेट प्रॉफिट में नहीं रही है। कंपनी को मार्च 2021 में खत्म तिमाही में ₹9,500- ₹10,000 करोड़ का घाटा होने का अनुमान लगाया गया था।एअर इंडिया पर 31 मार्च 2019 तक कुल 60 हजार 74 करोड़ रुपए का कर्ज था। जो भी एअर इंडिया को खरीदेगा, उसे इसमें से 23,286.5 करोड़ रुपए का कर्ज भी लेना होगा। बाकी का कर्ज एअर इंडिया असेट होल्डिंग को एक स्पेशल परपज वेहिकल के जरिए ट्रांसफर किया जाएगा। जनवरी 2020 में जारी EoI में यह शर्त लगाई गई थी।

नॉन कोर असेट्स से कर्ज चुकाया जाएगा

एअर इंडिया की नॉन कोर असेट्स से जो पैसा आएगा, उसका उपयोग एअर इंडिया का कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। एअर इंडिया इन सभी संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रही है। एअर इंडिया की प्रॉपर्टी का रिजर्व प्राइस इसकी ओवरसाइट कमिटी द्वारा तय किया गया है। इसमें तीन वैल्यूअर्स से प्रपोजल मिला है।

16 प्रॉपर्टी की कीमत में की गई कमी

ओवरसाइट कमिटी ने 16 प्रॉपर्टी की रिजर्व कीमतों में 10% कमी करने को मंजूरी दी थी। क्योंकि कई बार इन प्रॉपर्टी की नीलामी की गई, पर कीमत ज्यादा होने से कोई खरीदार इसके लिए आगे नहीं आया। अक्टूबर 2020 में सरकार ने कहा था कि एअर इंडिया की बिक्री इसके इंटरप्राइज वैल्यू पर होगी, न कि इक्विटी वैल्यू पर। इंटरप्राइज वैल्यू का मतलब इक्विटी की वैल्यू, कर्ज और कंपनी के पास कैश से है। इक्विटी वैल्यू में केवल कंपनी के शेयरों के वैल्यू को लिया जाता है।

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