Caught Stealing Electricity By Installing Illegal Transformer – अवैध ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली चोरी करते पकड़ा


Nagaur. डिस्कॉम के तमाम प्रयासों के बाद भी जिले में अवैध ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली चोरी करने का सिलसिला थम नहीं रहा है

 

नागौर. डिस्कॉम की ओर से चल रहे सतर्कता अभियान में नागौर के अधिशासी अभियंता एफ. आर. मीणा के नेतृत्व में 11 केवी लाइन से बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। साढ़े तीन लाख का जुर्माना लगाया गया। बुनरावता में दो, ग्वालू में एक, गोलियासनी ग्राम में एक, बैराथल में एक, आंकला में एक, माडपुरा में एक व दुजासर में एक अवैध बिजली ट्रांसफार्मर पकड़ा गया।
योग शिक्षक कार्य दिवस बढ़ाने की मांग को लेकर एडीएम से मिले
नागौर. राजस्थान योग शिक्षक संघर्ष समिति ने प्रदेश उपाध्यक्ष मुरलीधर शर्मा के नेतृत्व में एडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से स्वास्थ्य केन्द्रों पर लगे योग शिक्षकों कार्य दिवस 10 दिन से बढ़ाकर 30 करने की मांग की है। मानदेय भी बढ़ाए जाने का आग्रह किया है। 15 सूत्रीय ज्ञापन पत्र के माध्यम से जल्द ही समाधान किए किए जाने का आग्रह किया है। इस दौरान मनीष इनाणियां, ओमप्रकाश, रामसिंह, रामप्रकाश, सुभाष खोजा आदि मौजूद थे।
शिक्षा शिक्षा के सेवा नियम बनाने एवं व्याख्याता शिक्षा के पद सृजित करने की मांग
नागौर. राजस्थान स्ववित्त पोषित महाविद्यालय शिक्षक महासंघ की ओर से अतिरिक्त जिला कलक्टर मनोज कुमार को ज्ञापन सौपा। महासंघ के प्रांतीय संयोजक राजेन्द्र श्रीमाली ने ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया कि शिक्षा विषय में स्नात्कोत्तर (एम.एड.), राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण योग्यताधारी , राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण योग्यताधारी , मास्टर ऑफ फिलॉसफी तथा शिक्षा में पीएच.डी. जैसी महत्वपूर्ण उपाधियों का राजस्थान में सिवाय निजी महाविद्यालय में नौकरी करने के अलावा और कोई महत्व नहीं रह गया है। शिक्षक शिक्षा की इन सभी उच्च डिग्री को वर्ष 1998 से शिक्षा विभाग भूल कर बैठा है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में एक राज्य शैक्षिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान परिषद् , दो राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान तथा 33 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान है, लेकिन सरकारी सेवाओं में शिक्षक शिक्षा की इन उच्च डिग्रियों का उपयोग नहीं के बराबर है। वर्ष 1998 से पहले शिक्षा विभाग अपने कार्मिक को एम.एड. के आधार पर प्रमोशन देता था लेकिन 1998 के बाद यह व्यवस्था समाप्त कर दी गयी। नतीजन आज पिछले 22 सालों से राजस्थान में एम.एड. जैसी उच्च योग्यता उपेक्षित हो रही है। राजस्थान स्ववित्त पोषित महाविद्यालय शिक्षक महासंघ के प्रदेश संयोजक श्रीमाली ने बताया कि जहां एक ओर वर्ष 2015 से वर्मा समिति की सिफारिश के पश्चात बी.एड. का पाठ्यक्रम दो वर्ष का करके बी.एड. को उच्च शिक्षा में शामिल कर लिया गया था, वहीं दूसरी ओर अनुदानित बी.एड. शिक्षकों के लिए सरकार ने पांच शासकीय बी.एड. कॉलेज स्थापित किए थे। जो शिक्षक शिक्षा के सेवानियम के अभाव में बन्द होने के कगार पर है। आज राज्य की शिक्षक-शिक्षा व्यवस्था दोहरे नियम पर चल रही है। जहां एक ओर निजी बी.एड. कॉलेज उच्च शिक्षा आयुक्तालय जयपुर के अधीन है, वहीं राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान शिक्षा निदेशालय स्कूल शिक्षा बीकानेर के अन्तर्गत संचालित है। शिक्षा विभाग के माध्यम से राजस्थान में शिक्षक शिक्षा के सेवानियम बनाए जाने के साथ ही राजस्थान लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षा विषय में व्याख्याता के पद सृजित किए जाए। ताकि राज्य शैक्षिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान परिषद्, राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रतिनियुक्तियां बंद हो एवं व्याख्याता शिक्षा के आधार पर नियुक्ति हो सके ताकि लाखों एम.एड., नेट, सेट, एम.फिल. और पी.एच.डी. योग्यताधारी बेरोजगार व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हो सके।





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