Collector Sahib: Why These Children Do Not Get Water – कलक्टर साहब: क्यों नहीं मिलता इन बच्चों को पानी


सरकार ने चूरू में भले ही मेडिकल कॉलेज खोल दिया हो लेकिन बात जब सुविधाओं की करें तो कई समस्याएं यहां मुंह बाए खड़ी। जिसका सामना यहां अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को करना पड़ रहा है।

चूरू. सरकार ने चूरू में भले ही मेडिकल कॉलेज खोल दिया हो लेकिन बात जब सुविधाओं की करें तो कई समस्याएं यहां मुंह बाए खड़ी। जिसका सामना यहां अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को करना पड़ रहा है। लाखों रुपए की फीस अदा की। सुविधा शुल्क मेडिकल कॉलेज प्रशासन को दिया लेकिन विद्यार्थी इनसे वंचित है। जिला कलक्टर की नाक के नीचे मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ ऐसा बर्ताव समझ से परे है। जब इस संबंध में विद्यार्थियों से पत्रिका ने जब पूछताछ की तो उन्होंने कहा कलक्टर साहब इस भीषण गर्मी में भी विद्यार्थियों को पानी नसीब नहीं है। हालात तो यहां ऐसे उपज गए हैं कि विद्यार्थी पानी के कैंपर मंगवाने को मजबूर है। यही नहीं दैनिक दिनचर्या के लिए भी भावी चिकित्सकों को परेशान होना पड़ रहा है। इस गर्मी में विद्यार्थी गला तर करने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इनके सब के बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन मौन रहकर ये माजरा देख रहा है। मेडिकल छात्रों ने बताया कि दिन की शुरुआत होते ही पानी का जुगाड़ करने की चिंता सताने लगती है। गल्र्स व ब्यॉज हॉस्टल में इस वक्त करीब 400 विद्यार्थी रह रहे हैं। यहां वॉटर कूलर खराब पड़े हैं। ऐसे में पानी लेने के लिए तीन-चार किमी दूर अस्पताल में आना पड़ता है। मेडिकल छात्रा रमा ठाकुर ने बताया कि गर्मियों के दिनों में स्वयं के खर्चे पर कैम्पर मंगवाए, लेकिन बाद में सप्लाई वाला नहीं आया। उन्होंने बताया कि एक छात्र ने फीस के तौर पर करीब साढ़े सात लाख रुपए जमा कराए हैं, इसके अलावा अन्य खर्चों के लिए अतिरिक्त राशि दी है। लेकिन कॉलेज कैम्पस में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सड़क के नाम पर कंकरीट व झाडिय़ां उगी हुई है। ग्राउंड पर बेसहारा पशुओं का जमावड़ा रहता है। गल्र्स हॉस्टल के फर्श की टाईल्स उखड़ चुकी है, शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं,सफाई नहीं होने से दिनभर बदबू मारते हैं।
बार-बार होती है ट्रिपिंग
मेडिकल छात्रा कविता ने बताया कि लोड कम होने से ट्रिपिंग की समस्या बनी हुई है, उन्होंने बताया कि तस्वीर में दिखाए मेडिकल कॉलेज की धरातल पर वास्तविकता काफी भयावह है। मामले को लेकर कॉलेज प्रशासन, वॉर्डन तक आंख मूंदे हुए हंै। जिम व स्पोर्टस के नाम पर सालाना 20 हजार रुपए जमा होते हैं, लेकिन आज तक न तो जिम शुरू हुआ ना ही स्पोर्टस मैदान तैयार हो पाया है। ऑडियो सिस्टम भी सही नहीं होने से क्लास में आवाज साफ नहीं आ पाती है, प्रोजेक्टर का भी अभाव है। कूलिंग के लिए सेंट्रल एसी भी शुरू नहीं होने से विद्यार्थी परेशान हैं। मेडिकल छात्र प्रवीण ने बताया कि बॉयज हॉस्टल दुर्दशा का शिकार है। छात्रों के कमरों के गेट टूट चुके हैं। ठंडी हवा के नाम पर केवल पंखे लगे हैं। सड़क का काम अभी तक नहीं हुआ है। गर्मियों में मच्छरों के कारण नींद सही तरीके से नहीं आ पाती है। उन्होंने बताया कि लाईब्रेरी की हालत भी खराब है। हॉस्टल सहित कॉलेज में लाइटें खराब पड़ी हुई है।
वार्डन बोले वेस्ट ऑफ टाइम, वेस्ट ऑफ एनर्जी
मेडिकल कॉलेज के छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की समस्या सुनकर बॉयज हॉस्टल के वार्डन डॉ. दिलीप ने कहा कि समस्याओं को लेकर 26 जनवरी को जनप्रतिनिधियों को बताया गया। लेकिन जनप्रतिनिधियों को समस्या बताना वेस्ट ऑफ टाइम व वेस्ट ऑफ एनर्जी है। पत्र लिखकर समस्या बताने से कोई लाभ नहीं होगा, सिस्टम जैसा चल रहा है, वैसे ही चलता रहेगा। कितना भी प्रयास कर ले समस्या वैसी ही रहेगी, कोई सुनने वाला नहीं है।
इनका कहना है
कैम्पस में पानी सप्लाई करने वाला वॉटर पम्प ब्लॉक हो गया था, लॉकडाउन के चलते ठीक कराने में समस्या आई है।बाद में मैकेनिक को बुलाकर मोटर को पुणे भेज दिया गया है अभी तक ठीक होकर नहीं आई है।बिजली समस्या के समाधान के लिए इलेक्ट्रीशियन रखा हुआ है, जो कोई परेशानी आने पर समाधान कर देता है।मैस को लेकर छात्रों के अलग-अलग विचार आ रहे थे।इसकों लेकर छात्रों को कमेटी बनाने के लिए इसकी व्यवस्था करने के लिए कहा गया है।कॉलेज में सभी व्यवस्थाएं सही चल रही है, जो कमी है उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
गजेन्द्र सक्सैना, प्रिंसीपल, पं. दीनदयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज चूरू






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