Cows Potty Training; Germany Scientists Develop Special Toilet To Stop Greenhouse Gas Emissions | गायों को इंसानों की तरह टॉयलेट का इस्तेमाल करना सिखाया, जर्मन वैज्ञानिकों दावा; इससे ग्रीनहाउस गैस आमोनिया के उत्सर्जन को कंट्रोल कर सकेंगे


  • Hindi News
  • Happylife
  • Cows Potty Training; Germany Scientists Develop Special Toilet To Stop Greenhouse Gas Emissions

10 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

गाय भी इंसान की तरह टॉयलेट का इस्तेमाल कर सकती है। जर्मनी के वैज्ञानिकों ने गायों को इस तरह ट्रेनिंग दी है कि ये इनके लिए खासतौर पर बनाए गए टॉयलेट ‘मूलू’ में जाकर ही यूरिन रिलीज करती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, गायों के ऐसा करने पर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम किया जा सकेगा।

गायों का इस तरह टॉयलेट में जाकर यूरिन रिलीज करना पर्यावरण के लिए फायदेमंद साबित होगा। यह स्टडी जर्मनी के रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर फार्म एनिमल बायोलॉजी ने की है।

ऐसे रोकते हैं ग्रीनहाउस गैस
करंट बायोलॉजी में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, खुले में जानवरों के मलत्याग को रोककर आमोनिया को बढ़ने से रोका जा सकता है। जो मिट्टी की उर्वरता पर बुरा असर डालती है। सूक्ष्मजीवों की मदद से आमोनिया नाइट्रस ऑक्साइड में तब्दील हो सकती है। जो कार्बन-डाई ऑक्साइड और मेथेन के बाद तीसरी सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है।

ग्रीनहाउस गैसों में कार्बनडाइऑक्साइड, मेथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, हाइड्रोफ्लोरोकार्बन, परफ्लोरोकार्बन (पीएफसी) और सल्फर हेक्साफ्लोराइड शामिल हैं। यह गैसें दुनियाभर में तापमान में हो रही वृद्धि के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होती हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है, कृषि आमोनिया के उत्सर्जन का बड़ा सोर्स है। इसीलिए हमनें एक खास तरह का टॉयलेट तैयार किया है। जहां पर गाय के वेस्ट से आमोनिया को इकट्ठा किया जा सकता है और सीधे वातावरण में फैलने से रोका जाता है।

गायों की हर एक्टिविटी पर नजर रखी गई।

गायों की हर एक्टिविटी पर नजर रखी गई।

मवेशी भी हैं चालाक, इनमें भी सीखने भी क्षमता
शोधकर्ता जेन लैंगबीन का कहना है, आमतौर पर लोग मानते हैं कि मवेशी को मल त्याग करने और पेशाब करने के मामले में कंट्रोल नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसा नहीं है। मवेशी भी दूसरे जानवर की तरह चालाक होते हैं और काफी कुछ सीख सकते हैं। इसलिए हम इन्हें टॉयलेट का इस्तेमाल करना क्यों नहीं सिखा सकते।

जर्मन वैज्ञानिकों का कहना है, आमतौर पर मवेशियों को मैदानों में चरने के लिए छोड़ दिया जाता है। ये मवेशी वहां पर यूरिन और मलत्याग करते हैं। यह मल वहां की मिट्टी और पास के जलस्रोत को दूषित करने का काम करता है। इसलिए इनके मल को एक टॉयलेट में इकट्ठा करके आमोनिया को फैलने से रोक सकते हैं।

ट्रेनिंग देने के बाद 16 में से 11 गाय अपने टॉयलेट में मलत्याग करना सीख गईं थी।

ट्रेनिंग देने के बाद 16 में से 11 गाय अपने टॉयलेट में मलत्याग करना सीख गईं थी।

ऐसे दी गई गायों को ट्रेनिंग
वैज्ञानिकों ने बछड़ों को ट्रेनिंग देनी शुरू की। इसके लिए बछड़ों को हर समय मीठी चीजें खिलाई गईं ताकी इन्हें यूरिन अधिक महसूस हो। इसके बाद इन्हें खास तरह के टॉयलेट में पेशाब करना सिखाया गया। बछड़ों को एक बंद टॉयलेट में भेजा जाता था, जहां ये पेशाब करने की कोशिश करते थे।

शोधकर्ता जेन लैंगबीन का कहना है, धीरे-धीरे इन्हें बाहर मैदान में पेशाब न करने की भी ट्रेनिंग दी गई। जब भी ये बाहर पेशाब करते थे तो इन्हें हेडफोन से बुरी-बुरी आवाजें सुनाई जाती थीं। यह इनके लिए एक तरह की सजा होती थी।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, कुछ हफ्तों की ट्रेनिंग के बाद 16 में से 11 बछड़े ‘मूलू’ टॉयलेट में जाना सीख गए। छोटे बछड़ों को यह ट्रेनिंग देना बड़े बछड़ों के मुकाबले आसान होता है।

खबरें और भी हैं…



Source link

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RSS
Follow by Email