If 7.5 crore vaccines are not received every month, then the speed of vaccination will slow down | हर माह 7.5 करोड़ कोवैक्सीन नहीं मिली तो धीमी पड़ेगी टीकाकरण की रफ्तार


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3 मिनट पहले

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उत्पादन के लिए भारत बायोटेक ने 3 कंपनियों से करार किया और एक सब्सिडियरी को जोड़ा - Dainik Bhaskar

उत्पादन के लिए भारत बायोटेक ने 3 कंपनियों से करार किया और एक सब्सिडियरी को जोड़ा

  • कंपनी अभी तक हर माह 2.5 करोड़ डोज बना पा रही
  • उत्पादन भी 20 लाख डोज/माह

देश की बड़ी आबादी को देखते हुए वैक्सीनेशन की रफ्तार कायम रखना जरूरी है। मगर इसमें सबसे बड़ी बाधा अभी वैक्सीन की उपलब्धता के रूप में सामने आ रही है। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क टीकाकरण की रफ्तार को धीमा कर रहा है।

सरकार ने वैक्सीन के ताजा ऑर्डर के साथ यह जानकारी दी थी कि अगस्त से दिसंबर के बीच कोवैक्सीन और कोविशील्ड कुल 88 करोड़ डोज का उत्पादन करेंगे। इसमें 75% केंद्र सरकार और 25% निजी अस्पतालों के लिए होगा। इसमें 50 करोड़ डोज कोविशील्ड और 38 करोड़ डोज कोवैक्सीन के होंगे।

ये आंकड़ा यूं तो कोवैक्सीन की उपलब्धता के पिछले आंकड़ों और कंपनी के अपने दावों से काफी कम है, मगर भास्कर की पड़ताल बताती है कि कंपनी के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर तो अगस्त-दिसंबर के बीच 38 करोड़ डोज मिलना भी मुश्किल है। कोवैक्सीन का उत्पादन अभी प्रतिमाह 2.5 करोड़ डोज का है, जुलाई में यह बढ़कर 7.5 करोड़ होना था।

मगर कंपनी 2.5 करोड़ डोज ही मुहैया करा पाई। केंद्र सरकार ने 26 जून को सुप्रीम कोर्ट में दायर पूरक हलफनामे में जुलाई में 2 करोड़ कोवैक्सीन डोज मिलने की बात कही थी। उत्पादन बढ़ाने के लिए जिन 3 कंपनियों से करार हुआ था उनमें से 2 में अभी इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम चल रहा है।

तीसरी कंपनी ने 15 जुलाई से 20 लाख डोज बनाना शुरू किया है। भारत बायोटेक ने सब्सिडियरी चिरोन बेहरिंग को भी कोवैक्सीन के उत्पादन में लगाने का दावा किया था। यहां उत्पादन जून में शुरू होना था, अब तक नहीं हो पाया है।

4 कंपनियों को कोवैक्सीन बनानी है…2 में इस वर्ष उत्पादन मुश्किल, 1 में सितंबर-अक्टूबर से प्रोडक्शन होगा, सिर्फ 1 में बन रही वैक्सीन

हाफकाइन, मुंबई 1.9 करोड़ डोज प्रतिमाह दिसंबर से बननी है, सरकारी दावे के मुताबिक

हकीकत: जनरल मैनेजर सुभाष शंकरवार कहते हैं कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर शुरू हो गया है, मगर प्रोजेक्ट प्लांट सहित अन्य चीजें अभी अप्रूवल प्रोसेस में हैं। प्रोडक्शन कब से शुरू हो पाएगा…इसकी टाइमलाइन अभी तैयार की जा रही है। घोषणा जल्द करेंगे।

बिबकोल, बुलंदशहर
1 करोड़ डोज प्रतिमाह दिसंबर से उत्पादन होना है, सरकारी दावे के मुताबिक

हकीकत: भारत बायोटेक की टीम लैब का भौतिक सत्यापन भी नहीं कर पाई। केंद्र की 30 करोड़ की ग्रांट लैब व यूनिट पर खर्च हो चुकी है। बीएसएल-3 सुविधा बनाने के लिए अतिरिक्त ग्रांट मांगी गई है। वाइस प्रेसिडेंट राजीव शुक्ला कहते हैं कि दिसंबर तक उत्पादन शुरू हो जाएगा।

आईआईएल, हैदराबाद

50 लाख डोज प्रतिमाह यहां उत्पादन करने का दावा है भारत बायोटेक का हकीकत: इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स लि. (आईआईएल) के एमडी डॉ. आनंद कुमार का कहना है कि 15 जुलाई से यहां एक यूनिट में प्रति माह 20-30 लाख डोज बन रही है। दूसरी यूनिट अभी तैयार हो रही है, इसके बाद ही 50 लाख उत्पादन संभव होगा।

चिरोन बेहरिंग, गुजरात

2 करोड़ डोज प्रतिमाह इस सब्सिडियरी में बनाने का दावा है भारत बायोटेक का

हकीकत: अंकलेश्वर में जून में उत्पादन शुरू होना था। सूत्रों के मुताबिक रॉ मैटेरियल की कमी है। सितंबर-अक्टूबर तक उत्पादन की उम्मीद है। हालांकि यहां वर्ष के 20 करोड़ यानी प्रतिमाह 1.6 करोड़ डोज ही बनाए जाएंगे। जो कंपनी के आधिकारिक दावे से कम है।

अक्टूबर, 2021 से 4.40 करोड़ डोज प्रतिमाह बन सकती है कोवैक्सीन

भारत बायोटेक ने अभी तक अपने प्रतिमाह वैक्सीन उत्पादन का कोई ब्रेकअप सार्वजनिक नहीं किया है। अनाधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अभी कंपनी प्रतिमाह 2.5 करोड़ डोज ही बना रही है। यदि आईआईएल में प्रतिमाह उत्पादन 20 लाख से बढ़कर 30 लाख हो जाए और चिरोन बेहरिंग में अक्टूबर तक प्रतिमाह 1.6 करोड़ डोज भी बनाने लगे तो कुल वैक्सीन उपलब्धता 4.40 करोड़ ही होगी। जबकि सरकारी दावा अगस्त से ही प्रतिमाह 7.5 करोड़ कोवैक्सीन डोज के उत्पादन का है।

अहमदाबाद से चिंतन आचार्य, मुंबई से विनोद यादव, बुलंदशहर से एम. रियाज हाशमी और हैदराबाद से एम.एस. शंकर की रिपोर्ट (इनपुट : प्रमोद कुमार)

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