Jaipur Heritage And Greater Nagar Nigam Puncture Expenses News – लखपति पंक्चर वाला, हर महीने पंक्चर बनाकर कमाता है एक लाख रुपए


हाल-ए-निगम : खस्ता हाल नगर निगम का ‘शाही’ खर्च, 170 गाडिय़ों के पंक्चर का सालाना खर्च 12 लाख

अश्विनी भदौरिया / जयपुर। आपकी गाड़ी पिछली बार शहर में कब पंक्चर हुई थी, आपको शायद याद नहीं होगा लेकिन नगर निगम की गैराज शाखा की 170 गाडिय़ां धड़ाधड़ पंक्चर हो रही हैं। पंक्चर ठीक कराने पर हैरिटेज नगर निगम में प्रतिमाह 30 हजार और ग्रेटर नगर निगम में प्रतिमाह 70 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं। यानी सालभर में 12 लाख रुपए फूंके जा रहे हैं।

निगम ने यह काम ठेके पर दे रखा है। दरअसल, दोनों निगमों की गैराज शाखा ठेेके पर ही चल रही है। निगम की आर्थिक हालत खस्ता है लेकिन गैराज शाखा के खर्चे ‘शाही’ हैं। ऐसे में दोनों महापौर के लिए गाड़ी अब तक नहीं खरीदी जा सकी है।

पंक्चर का गणित
– 170 गाडिय़ां हैं निगम की गैराज शाखा में, इनमें हूपर से लेकर सीवर जेटिंग मशीन, आरसी तक शामिल
– 01 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं इनके पंक्चर ठीक कराने पर प्रतिमाह
– 588 रुपए का खर्च पंक्चर ठीक कराने पर आ रहा है प्रतिदिन औसतन एक वाहन पर
– 01 वाहन के पंक्चर ठीक कराने पर औसतन 7 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं सालाना

न्यायसंगत नहीं है, दिखवाते हैं…
हाल ही एक बैठक में ग्रेटर निगम के आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव को पता चला कि पंक्चर दुरुस्तीकरण पर इतनी राशि खर्च हो रही है तो वह चौंक गए। गैराज उपायुक्त अतुल शर्मा से उन्होंने पूछा, क्या इतना खर्च न्यायसंगत है? शर्मा ने कहा, नहीं है…दिखवाते हैं।

महापौर की गाड़ी का किराया रोजाना 2400 रु.
दोनों निगम में महापौर किराए की गाड़ी में सवारी कर रही हैं। गाड़ी का एक दिन का किराया 2400 रुपए है। महीने के 72 हजार रुपए के हिसाब से इस किराया पेटे गैराज शाखा अब तक 5 लाख से अधिक का भुगतान कर चुकी है। गाडिय़ों की खरीद के मसले पर गैराज शाखा के अधिकारियों का कहना है, ‘तकनीकी दिक्कत’ है।

सरकारी रेट पर संंबंधित कम्पनी गाड़ी देने को तैयार नहीं है। मैकेनाइज्ड स्वीपिंग के नाम पर 10 लाख रुपए प्रति माह खर्च किए जा रहे हैं। वर्ष 2018 के बाद से यह खर्च हो रहा है। साफ सड़कों को ही बार-बार चमकाया जाता रहा है।

पंक्चर ठीक करने के लिए कर्मचारी 24 घंटे तैनात रहते हैं। ठेकेदार मैन पावर के साथ अन्य सामान भी उपलब्ध करवाता है। कोई विकल्प है तो उस पर भी विचार होगा। महापौर के लिए गाडिय़ां खरीदने की दो बार कोशिश की लेकिन दिक्कत आ रही है।

अतुल शर्मा, उपायुक्त, गैराज शाखा












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