Jaipur Kisan Sansad Debates On New Union Farm Law – किसान संसद में उठ रहे कृषि कानूनों सहित अन्य गर्माए मुद्दे, देशभर से पहुंचे हुए हैं ‘किसान सांसद’


जयपुर में आज जुटी है किसान संसद, बिरला सभागार में आयोजन, देश के विभिन्न किसान संगठनों से जुड़े किसान प्रतिनिधि मौजूद, सुबह 11 बजे से शुरू हुई कार्यवाही- संसद की तर्ज़ पर चल रहा सत्र, ‘किसान सांसदों’ के संकल्प के साथ हुई कार्यवाही की शुरुआत, केंद्रीय कृषि कानूनों सहित विभिन्न मुद्दों पर हो रही चर्चा

 

जयपुर।

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर राजस्थान किसान मोर्चा की ओर से बुलाई गई ‘किसान संसद’ आज जयपुर के बिरला सभागार में जारी है। देश भर के विभिन्न किसान संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि यहां बतौर किसान सांसद शामिल हुए हैं।

 

संकल्प के साथ हुई शुरुआत
किसान संसद की शुरुआत किसान सांसदों द्वारा एक संकल्प के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और फिर शहीद किसानों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजली दी गई।

 

प्रथम सत्र में तीन बिलों पर चर्चा
किसान संसद के प्रथम सत्र के दौरान केंद्र के तीन कृषि कानूनों के प्रमुख मुद्दे पर चर्चा हुई। इस विषय पर चुनिंदा किसान प्रतिनिधियों ने अपना-अपना वक्तव्य दिया।

 

शून्य काल में भी गर्माए मुद्दों पर चर्चा
भोजनावकाश के बाद शुरू हुए शून्यकाल में भी कई ज्वलंत मुद्दों को लेकर चर्चा हुई। इनमें महंगाई, बेरोज़गारी, मुद्रीकरण, निजीकरण और जातीय जनगणना जैसे मुद्दों पर रखी गई।

 

ये ‘किसान सांसद’ हुए शामिल
किसान संसद में ‘किसान सांसद’ के तौर पर पहुंचे देश भर के किसान प्रतिनिधियों में प्रमुख रूप से पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और दिल्ली से किसान प्रतिनिधि पहुंचेंगे। किसान नेता राकेश टिकैत और युद्धवीर सिंह हालांकि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम होने के कारण किसान संसद में शामिल नहीं हो सकेंगे, लेकिन यहां पहुँचने वाले अन्य नेताओं में बलवीर राजेवाल, गुरनाम सिंह चढूनी, जोगिन्दर सिंह उगराहा, बूटा सिंह बुर्जगिल, डॉ दर्शन पाल, रुल्दू सिंह मानसा, सुरजीत सिंह फूल, मंजीत सिंह राय, अभिमन्यु कोहाड़, सुरेश खोत, गुरुनमित मांगट, आत्मजीत सिंह, चिडियाला साब और अमरजीत मोरी शामिल हैं।

 

संसद की तर्ज़ पर हो रहे सत्र
किसान संसद की कार्यवाही ठीक संसद सत्र की तरह चल रह है। इसमें प्रश्न काल से लेकर शून्य काल सहित संसद की तरह विभिन्न सत्र रखे गए हैं। किसान प्रतिनिधि किसान सांसद के रूप में पहुंचे हैं। जबकि संसद की तर्ज़ पर ही दो लॉबी ‘हां’ पक्ष और ‘ना’ पक्ष खासा आकर्षण का केंद्र हैं।















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