Jakarees Echoed At Ganpati Bappa’s House – भगवान गणेश को लगाया मोदक के लड्डूओं व चूरमे का भोग, बप्पा के घर घर गूंजे जैकारे


भगवान गणेश को प्रिय मोदक के लड्डूओं व चूरमे का भोग लगाकर की समृद्धि की कामना

By: Jay Kumar

Published: 11 Sep 2021, 12:24 PM IST

जोधपुर. देवी-देवताओं में प्रथम पूज्य गणनायक भगवान गणेश का जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी शुक्रवार को घरों में हर्षोल्लास से मनाया गया। घरों व मंदिरों में गणपति को प्रसन्न करने के लिए दूब, पुष्प सहित गणेश को प्रिय मोदक के लड्डूओं व चूरमे का भोग लगाकर संपन्नता, समृद्धि की कामना की गई। गणपति के भक्तों ने दिन भर उपवास रखकर सभी विघ्न बाधाओं को दूर रखने की कामना के साथ पूजन किया। कोविडगाइड लाइन के कारण लगातार दूसरे वर्ष भी रातानाडा गणेश मंदिर के प्रवेश द्वार भक्तों के लिए बंद रहे। मंदिर शिखर पर सुबह पुजारी परिवार के सदस्य आनंदस्वरूप अबोटी, प्रदीप शर्मा, महेश व सुरेश अबोटी और पूर्व जेडीए अध्यक्ष डॉ. महेन्द्रसिंह राठौड़ व समाजसेवी शारदा चौधरी ने ध्वजारोहण किया। इससे पहले रातानाडा गणेश मंदिर में रिद्धि-सिद्धि सहित गणपति प्रतिमा का शृंगार कर ५१०० लड्डूओं का भोग लगाया गया। सुबह पांच बजे पुजारियों की ओर से शृंगार आरती और शाम को महाआरती की गई। मंदिर के प्रवेश द्वार बंद होने के बावजूद दिन भर मंदिर के नीचे सीढि़यों पर श्रद्धालुओं की ओर से भगवान गणेश को शीश नवाने का क्रम चलता रहा। नागौरीगेट के बाहर कागा तीर्थ स्थित शीतला माता मंदिर परिसर के अष्ट विनायक मंदिर, उदयमंदिर रसिक बिहारी मंदिर में दक्षिणमुखी विनायक, चांदपोल के बाहर विद्याशाला-किला रोड स्थित दक्षिणामुखी सिद्देश्वर गणेश मंदिर, जूनी मंडी स्थित गुरु गणपति मंदिर (इश्किया गजानन) में पुजारियों की ओर से अभिषेक व पूजन कर मोदक का भोग लगाया गया। महाराष्ट्र समाज जोधपुर की ओर से शास्त्रीनगर डी सेक्टर स्थित समाज के भवन में कोविड गाइडलाइन पालना के साथ इॅको फ्रेण्डली प्रतिमा स्थापित की गई। रातानाडा गणेश मंदिर व सोजतीगेट स्थित गढ़ लंबोदर गणेश मंदिर परिसर में आकर्षक रोशनी की गई। प्रतापनगर गणेश चौराहा स्थित मंदिर में १51 किलो मोदक के लड्डू का भोग लगाकार महाआरती की गई।

इस बार नहीं सजे अस्थाई मंडप
इस बार कोविड गाइडलाइन के कारण शहर के विभिन्न कॉलोनियों, मोहल्लों में सजने वाले अस्थाई गणपति मंडप नदारद रहे। लगातार दूसरे वर्ष भी गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक दस दिवसीय गणेश महोत्सव केवल घरों में ही मनाए जाएंगे। इॅको फ्रेण्डली गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन भी घरों में जलपात्रों में किया जाएगा।













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