Mohan arrived with a procession to give happiness to Vandana, the villagers performed the rituals in the absence of relatives; bid farewell to the bride and groom | दिव्यांग लड़की के साथ प्यार करने पर घरवाले नाराज हुए, अकेला बारात लेकर पहुंचा दूल्हा; गांव वालों ने कराई शादी


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ललितपुर16 मिनट पहले

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दिव्यांग वंदना से मोहन ने रचाई शादी। गांव वालों ने दिया साथ। - Dainik Bhaskar

दिव्यांग वंदना से मोहन ने रचाई शादी। गांव वालों ने दिया साथ।

उत्तर प्रदेश के ललितपुर में एक युवक ने मोहब्बत की मिसाल पेश की। युवक ने एक नेत्रहीन युवती से धूमधाम से शादी की। वंदना उसे एक नजर में पसंद आई तो उसने शादी करने की बात अपने घर पर बताई लेकिन घरवाले राजी नहीं हुए। फिर भी उसने शादी करने की बात कही तो भाई और मां ने घर से निकाल दिया। दूल्हा बनकर मोहन अकेले ही दिव्यांग वंदना के घर के बाहर पहुंच गया। इतना प्यार देख गांव वालों ने दोनों की शादी कराई।

छोड़ दी थी बेटी की शादी की उम्मीद

ब्लॉक मड़ावरा की ग्राम पंचायत मदनपुर के दिव्यांग बब्बू रायकवार की बेटी वंदना दोनों आंखों से जन्म से ही अंधी है। पिता बब्बू ने बेटी की शादी के लिए कई बार कोशिश की, लेकिन किसी ने उसकी बेटी का हाथ नहीं थामा। फिर उम्मीद ही छोड़ दी। लेकिन, मध्य प्रदेश के सागर के ग्राम मड़ावन का मोहन रायकवार को भगवान ने उसकी बेटी के लिए भेज दिया। वो पेशे से कारीगर है। मोहन एक बार काम से गांव आया था, तभी उसे वंदना दिखी और एक नजर में ही प्यार हो गया। उसने उसके पिता से शादी की बात कही।

गांव वालों ने पूरी की अपनों की कमी

मोहन का परिवार इस शादी के खिलाफ था। कई बार परिवार को मनाने के बाद भी वो जब कामयाब नहीं हुआ तो अपने दोस्तों के संग अकेला ही बारात लेकर निकल आया। मोहन को वंदना से शादी करने पर उसकी मां और भाई ने उसको घर से निकाल दिया था। इसके बावजूद वो वंदना के घर बारात लेकर पहुंचा। उसके साथ सात फेरे लिए और हमेशा के लिए अपना बना लिया। शादी समारोह में अपनों की कमी गांव के लोगों ने पूरी कर दी।

वंदना को खुशियां देने की चाहत

मोहन ने बताया कि वो वंदना को संसार की सभी खुशियां देना चाहता है। शादी करके वो वंदना को बहुत खुश रखेगा। शादी के बाद वंदना को खाना बनाने और घर का काम करना नहीं पड़ेगा। वो खाना बनाना और घर का काम करना जानता है। वो खुद वंदना के लिए खाना बनाएगा। उसने बताया कि वो एक महीने बाद पत्नी को अपने साथ मऊ ले जाएगा। मऊ में घर का बंदोबस्त करने के लिए उसके ठेकेदार ने एक लाख रुपय दिए है।

ऐसे हुआ दोनों का मिलन

मोहन ने बताया कि एक महीने पहले उसके स्वर्गीय पिता के दोस्त करन सिंह ने उसे फोन पर वंदना के बारे में बताया था। जिसके बाद वो वंदना को देखने मदनपुर भी गया था। तभी उसे वंदना अच्छी लगी। कहीं से रिश्ता न आने से वंदना की परेशानी उसके चेहरे से साफ झलक रही थी। उसने वंदना से शादी करने का फैसला कर लिया था। जब वापस रतनपुर जाकर उसने घर पहुंचकर अपने परिवार से इस बारे में बात की तो, उन्होंने साफ मना कर दिया। घर से निकाले जाने के बाद वो सीधे पिता के दोस्त करन सिंह के घर मड़ावन पहुंच गया। मड़ावन से वो बारात लेकर वंदना के घर पहुंचा।

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