My dream shines in underground coal mines, the happiness of getting the title first lady Engineer in coal mines can’t express in words says Akanksha Kumari on Engineer’s Day | अंडरग्राउंड कोल माइन्स की संकरी गलियों में दमकता है मेरा सपना, पहली महिला इंजीनियर का तमगा मिलने की खुशी नहीं कर सकती शब्दों में बयां


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नई दिल्ली27 मिनट पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा

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  • पीला रंग पसंद करने वाली इस लड़की को लुभाती है अंधेरी दुनिया।
  • कोल माइन्स की संकरी गलियों में मिली आधी आबादी को पहचान।

मैं आकांक्षा कुमारी, जिसे पीला रंग बेहद पसंद है और अंधेरी दुनिया लुभाती है।अंडरग्राउंड कोल माइन्स की संकरी गलियों और टेडी-मेढ़ी पटरियों पर मेरी आंखें चमकने लगती हैं। उस स्याह अंधेरे में मैं खुद के सपने की रोशनी का उजाला देखती हूं। अपने सपने को हीरे सा दमकता महसूस करती हूं। इस अंधेरी दुनिया में जब मैंने कदम रखा, तब मुझे अंदाजा भी नहीं था कि मैं कोयला के खदान में काम करने वाली देश की पहली महिला इंजीनियर बन जाऊंगी। ये पहली महिला होने का तमगा ताउम्र की उपलब्धि है, जिसकी खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती है।

बालू से ​बना घरौंदा गिर जाता है, फिर खदान क्यों नहीं धंसती?
बचपन से ही मेरे मासूम मन में एक सवाल कुलबुलाता था कि क्या एक दिन यह धरती धंस जाएगी? इस सवाल की वजह थी कि जब मैं छोटी थी और किसी नदी या झरने के किनारे गीली बालू में पैर डालकर घरौंदा बनाती, तो पैर निकालते ही बालू का घर भरभराकर गिर जाता। मैं झारखंड के हजारीबाग जिले के बरकागांव से हूं। मेरे आसपास का जो क्षेत्र है, वो कोयला खदानों से भरा हुआ है। ​कोयला निकलता और सैकड़ों ट्रक उसे लेकर रवाना होते। फिर कुछ दिनों बाद दूसरा सवाल उठ खड़ा हुआ कि पैर निकालने पर बालू का घर भरभरा जाता है, तो फिर खदान क्यों नहीं धंसती? सच कहूं तो मैं इस सवाल का जवाब ढूढ़ते हुए अंडरग्राउंड कोल माइन्स पहुंच गई।

फॉर्म देख चौंक गए थे काउंसलिंग में बैठे सर
मैंने धनबाद के बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सिंदरी से माइनिंग इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। मुझे याद है कि जब मैं काउंसलिंग में पहुंची थी और वहां बैठे लोगों ने मेरे फॉर्म पर माइनिंग इंजीनियरिंग देखा तो वो लोग हैरान हो गए और थोड़े चिंतित भी। उन्होंने मुझे एक ​बार और सोचने की सलाह दी, लेकिन मुझे अपने सवाल का जवाब चाहिए था तो भला मैं कुछ और कैसे सोच पाती। मैंने फटाक से कहा, नहीं सर मैं माइनिंग इंजीनियरिंग ही पढ़ना चाहती हूं।

एक बार लगा कि ले लिया गलत फैसला!
बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सिंदरी में मेरा एडमिशन हो गया। शुरुआत में अक्सर क्लास में बैठकर सवाल के साथ अंधेरी दुनिया की सैर पर निकल पड़ती। इस दौरान मेरा उत्साह सातवें आसमान पर रहता। हालांकि, धीरे-धीरे किताबों और शिक्षकों की मदद से सवाल के जवाब तक पहुंच गई, लेकिन कॉलेज में चार साल की पढ़ाई में कोई लड़की दोस्त तो दूर आसपास भी नहीं थी। तब एकबारगी लगा कि कहीं गलत फैसला तो नहीं ले लिया। हालांकि, अंधेरी दुनिया के प्रति मेरे आकर्षण ने मुझे कभी किसी रास्ते पर भटकने नहीं दिया।

कॉलेज के साथियों के साथ आकांक्षा कुमारी

कॉलेज के साथियों के साथ आकांक्षा कुमारी

मिला परिवार का साथ, तो बन गई नई राह
मेरे परिवार में मां-पापा और मेरे समेत तीन बहनें व एक भाई है। पापा शिक्षक हैं और मां हाउसवाइफ। मैंने 12वीं तक की पढ़ाई नवोदय विद्यालय से की है। वर्ष 2014 में जब मैंने माइनिंग इंजीनियरिंग से बीटेक करने की अपनी इच्छा बताई। सुनकर पापा थोड़े परेशान हुए कि अंडरग्राउंड माइन्स में काम करूंगी, लेकिन उन्होंने अपने कुछ दोस्तों (कोल माइन्स में काम करते हैं) से बात की और हां कर दी। हालांकि, आसपास से जो भी सुनता था, वो जरूर कहता- अकेली लड़की कोय माइन्स में काम करेगी? इस पूरे सफर में मेरे परिवार ने पूरा साथ दिया, तभी मैं अलग राह पर पहुंच पाई।

कोल माइन्स की सुरंगों में अटका था मन
वर्ष 2018 में माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की राजस्थान स्थित बलारिया माइन्स में काम किया, लेकिन मन तो अंडरग्राउंड कोल माइन्स की सुरंगों में अटका था। वहां माइन्स से मैटल निकालने के लिए विस्फोट किया जाता था, जबकि कोल माइन्स में सुरंग बनाकर ​कोयला निकाला जाता है। जब 24 अगस्त, 2021 को सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की अंडरग्राउंड कोल माइन्स में काम करने का मौका मिला, तब लगा कि जैसे वर्षों की तपस्या पूरी हो गई।

बिरियानी के लिए दीवानी हूं
निजी​ जिंदगी की बात करूं तो मेरी जिंदगी बिल्कुल आम लड़कियों जैसी ही है। मुझे घूमना और नई-नई जगहों को एक्सप्लोर करना पसंद है। घर के कामों में मां की मदद करने के अलावा वो खाना पकाना पसंद करती हूं, जो आमतौर झारखंड में नई पकाया जाता है। मैं बिरियानी खाने के लिए ​दीवानी हूं। गाने भी सुनती हूं और मन करता है, तो उन पर थिरकती भी हूं।

अपने जुनून को ही बनाएं करियर
मैं अपने देश की सभी महिलाओं और बहनों खासकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली लड़कियों से कहना चाहती हूं कि अपने जुनून को ही अपना करियर बनाएं। रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन अंत में आप वो अचीव करेंगी, जो आप चाहती हैं।

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