People of village in Darbhanga buy boats before bicycles and bikes | 9 महीने टापू बना रहता है गौरा गांव, यहां साइकिल-बाइक से पहले ग्रामीण नाव खरीदते हैं; देखिए VIDEO


दरभंगाएक घंटा पहले

यह गांव छह से नौ महीने तक पूरी तरह टापू की तरह ही बना रहता है।

दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान में एक ऐसा गांव है, जहां करीब हर परिवार के पास अपनी पर्सनल नाव है। इस गांव को अब ‘नाव वाला गांव’ भी कह सकते हैं। इसका असली नाम गौरा गांव है, जो कुशेश्वर के औराई पंचायत में आता है। यहां रहने वाले लोग साइकिल और बाइक बाद में खरीदते हैं, इससे पहले नाव खरीद लेते हैं। ऐश इसलिए क्योंकि यह गांव छह से नौ महीने तक पूरी तरह न सिर्फ टापू में तब्दील हो जाता है, बल्कि कई घरों में बाढ़ का पानी भी घुस जाता है। ऐसे में घर से बाहर किसी भी काम के लिए निकलने में नाव का ही सहारा होता है।

यहां रहने वाले लोग घर से निकल नाव चलाकर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं। फिर सड़क के किनारे पानी में नाव लगा मजदूरी करने निकल जाते हैं। महिला और बच्चे पशु चारे का इंतज़ाम करने के साथ-साथ बाकी जरूरी कामों के लिए भी नावों का इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि यहां सभी लोग नाव चलाना जानते हैं। बुजुर्ग हों या बच्चे, महिला हो या पुरुष, सभी अपनी-अपनी नाव खुद खे कर आते और जाते हैं।

इस गांव में घर से बाहर किसी भी काम के लिए निकलने में नाव ही सहारा होता है।

इस गांव में घर से बाहर किसी भी काम के लिए निकलने में नाव ही सहारा होता है।

गांव के मोहम्मद गुलशन आलम ने बताया कि यहां तकरीबन नौ महीने तक पानी भरा रहता है। सिर्फ नाव से ही सभी तरह के काम करने पड़ते हैं। काम पर जाना हो या बच्चों को स्कूल पहुंचाना हो या फिर किसी बीमार को अस्पताल पहुंचाना हो, सभी काम नाव के सहारे होते हैं।

गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए कोई सड़क नहीं
इस गांव की बदनसीबी है कि मुख्य सड़क से गांव को जोड़ने के लिए न तो कोई सड़क है और न ही कोई पुल है। कई दशकों से लोग यहां सड़क के साथ एक पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन सिवाए आश्वासन के आज तक कुछ नहीं मिला। गांव वालों की मानें तो एक सरकारी नाव भी इन लोगों को नसीब नहीं होती है। ऐसे में लोग करीब बीस हजार की नाव पहले खरीदते हैं, बाद में साइकिल या बाइक खरीदने की सोचते हैं। जिनके पास खुद की नाव नहीं, वे नाव वालों की मदद के मोहताज होते हैं। वहीं, मजदूरी कर गांव लौट रहे मोहम्मद मोइउद्दीन ने बताया कि पानी के कारण बहुत परेशानी होती है।

गौरा गांव में करीब 200 से 250 घर हैं और 1000 से ज्यादा की आबादी है, जो कुशेश्वर के औराई पंचायत में आता है।

गौरा गांव में करीब 200 से 250 घर हैं और 1000 से ज्यादा की आबादी है, जो कुशेश्वर के औराई पंचायत में आता है।

1000 से ज्यादा की आबादी रहती है प्रभावित
गांव में करीब 200 से 250 घर हैं और 1000 से ज्यादा की आबादी है। एक सड़क पुल की मांग गांव वाले लगातार करते आ रहे हैं। सभी अधिकारी, नेता, मुखिया से शिकायत की, लेकिन हर कोई एक दूसरे जिम्मेदारी डाल देता है।

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