People paying petrol price by cutting grocery; Expenditure on fuel from 62% in March to 75% in June | ईंधन पर खर्च 13 फीसदी बढ़ा; भोजन और स्वास्थ्य की जरूरताें में कटौती कर पेट्रोल-डीजल का दाम चुकाने को मजबूर हो गए लोग


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नई दिल्ली32 मिनट पहले

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एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष की रिपोर्ट के मुताबिक गैर-जरूरी खर्च के लिए रखे पैसों में से पेट्रोल-डीजल पर होने वाला खर्च जून 2021 में बढ़कर 75 फीसदी हो गया। - Dainik Bhaskar

एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष की रिपोर्ट के मुताबिक गैर-जरूरी खर्च के लिए रखे पैसों में से पेट्रोल-डीजल पर होने वाला खर्च जून 2021 में बढ़कर 75 फीसदी हो गया।

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों की वजह से ग्रॉसरी व यूटिलिटी सर्विसेज पर खर्च घटा
  • परिवारों की बचत दर घटकर जीडीपी की 8.2% पहुंच गई

पिछले कुछ महीनों से पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने से न केवल लोगों को महंगाई की बुरी मार झेलनी पड़ रही है बल्कि उनके पैसे खर्च करने का तरीका भी बदल गया है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की आर्थिक शाखा की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल-डीजल पर खर्च ज्यादा होने के कारण लोगों को स्वास्थ्य जैसी जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है।
कोरोना के पहले दौर की तुलना में दूसरे दौर की पहली तिमाही में जमा पैसा ज्यादा खर्च हुआ

एसबीआई कार्ड से होने वाले खर्च के विश्लेषण से पता चला है कि पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों से निपटने के लिए लोगाें को किराना, स्वास्थ्य सेवाओं सहित काम की अन्य सेवाओं पर खर्च कम कर दिया इससे इन उत्पादों की मांग में भी गिरावट आई है। एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष की रिपोर्ट के मुताबिक गैर-जरूरी खर्च के लिए रखे पैसों में से पेट्रोल-डीजल पर होने वाला खर्च जून 2021 में बढ़कर 75 फीसदी हो गया। जबकि इसी साल मार्च में यह 62 फीसदी था। यह भार लोगों पर ऐसे समय में पड़ा है, जब ज्यादातर परिवार महामारी और बढ़ती महंगाई के बोझ तले दबे हैं।

बिगड़ रहा मासिक बजट
दवाओं और स्वास्थ्य से जुड़े अन्य खर्च पहले ही लोगों का मासिक बजट बिगाड़ रहे हैं। लोगों को या तो बचत में कटौती करनी पड़ रही है या उनकी जमापूंजी कम हो रही है।

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