Psychologists are advising people to stay away from screens to avoid ‘digital addiction’ | ‘डिजिटल नशे’ से बचने के लिए मनोवैज्ञानिक लोगों को स्क्रीन से दूर रहने की सलाह दे रहे


वॉशिंगटन9 मिनट पहले

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डोपामाइन दिमाग में बनने वाला केमिकल है, जो न्यूरोट्रांसमीटर के तौर पर काम करता है। - Dainik Bhaskar

डोपामाइन दिमाग में बनने वाला केमिकल है, जो न्यूरोट्रांसमीटर के तौर पर काम करता है।

‘हाल ही में मुझसे एक युवा इलाज कराने आया। उसकी उम्र करीब 20 साल रही होगी। वह चिंता, अवसाद और कमजोरी से जूझ रहा था। कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने के बाद वह अपने माता-पिता के साथ ही रहता है। रह-रहकर उसके मन में खुदकुशी के ख्याल आते थे। उसका ज्यादातर वक्त वीडियो गेम खेलने में बीतता है।

दो दशक पहले ऐसे मरीजों को मैं एंटीडिप्रेसेंट देती थी। पर इस युवा को मैंने महीनेभर तक वीडियो गेम और तमाम स्क्रीन से दूर रहने (डोपामाइन फास्ट) की सलाह दी।’ यह कहना है स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में मनोचिकित्सक एना लेम्बके का। डॉ. लेम्बके के मुताबिक उन्होंने अपने करियर में चिंता और अवसाद से ग्रस्त कई मरीजों को देखा है। इनमें स्वस्थ युवा, अच्छा परिवार, बेहतर शिक्षा और आर्थिक स्थिति होने के बावजूद परेशान हैं। उनकी समस्या सामाजिक अव्यवस्था और गरीबी नहीं बल्कि डोपामाइन की अधिकता है।

यह दिमाग में बनने वाला केमिकल है, जो न्यूरोट्रांसमीटर के तौर पर काम करता है। जो खुशी और रिवॉर्ड की भावनाओं के साथ जुड़ा होता है। जब हम कोई खुशी मिलने वाला काम करते हैं, तो दिमाग थोड़ा डोपामाइन छोड़ता है और हमें अच्छा लगता है। जैसा कि इस युवा को लगता था। पर यह अहसास थोड़ी ही देर रहता है। इसके बाद हैंगओवर की भावना आती है। तो दिमाग फिर से वही काम करने के लिए प्रेरित करता है, कुछ देर इंतजार कर लिया तो यह भावना खत्म हो जाती है।

डिजिटल व्यसनों से बचने में सफल रहे तो खुशी जरूर महसूस होगी

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हमारे दिमाग ने लाखों वर्षों में इस संतुलन को व्यवस्थित किया है। खतरे उस वक्त भी थे। पर आज डिजिटल व्यसनों की लंबी फेहरिस्त है। टेक्स्टिंग, मैसेजिंग, सर्फिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, गैंबलिंग और गेमिंग। इन सभी डिजिटल उत्पादों को नशे की लत की तरह डिजाइन किया गया है। रोशनी का माहौल, सेलेब्रिटी की बातें और एक क्लिक पर इनामों की झड़ी हमें खींच ही लेती है। डॉ. लेम्बके बताती हैं, हर कोई गेम नहीं खेलता पर स्मार्टफोन सबके पास है। फोन का कम इस्तेमाल करना बेहद मुश्किल है।

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