T-Series and Reliance will invest up to thousand crores in films, while Sony Pictures will release 17 films in the next one year | टी सीरिज और रिलायंस फिल्मों में हजार करोड़ तक करेगा इनवेस्‍ट, वहीं सोनी पिक्‍चर्स अगले एक साल में 17 फिल्‍में करेगा रिलीज


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एक घंटा पहलेलेखक: अमित कर्ण

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फिल्म ‘थलाईवी’ के बाद माना जा रहा था कि सिनेमाघरों के लिए नई हिंदी फिल्‍में रिलीज होने के लिए नहीं हैं। साथ ही महामारी के चलते कयास यह भी थे कि फिल्‍म निर्माण के लिए मार्केट में नया इनवेस्‍टमेंट नहीं है। इन सभी चिंताओं को टी सीरिज, रिलायंस के बाद अब सोनी पिक्‍चर्स दूर करने के लिए एक बड़ी पहल कर रही है। टी सीरिज और रिलायंस जहां आने वाले महीनों में एक हजार करोड़ रुपए फिल्‍म निर्माण में खर्च करेंगे, वहीं सोनी पिक्‍चर्स 17 फिल्‍में अगले एक साल में सिनेमाघरों और ओटीटी पर रिलीज करेगें। हिंदी से उनके बैनर में रिलीज होने वाली फिल्‍में ‘तेरा क्‍या होगा लवली’, ‘लूप लपेटा’, ‘डाइव’, ‘साले आशिक’, ‘निकम्‍मा’, ‘आंख मिचोली’ और ‘मेजर’ हैं।

‘तेरा क्‍या होगा लवली’ में रणदीप हुड्डा और इलियाना डिक्रूज आएंगे नजर

हॉलीवुड से उनके बैनर की फिल्म ‘स्‍पाइडमैन: नो वे होम’, ‘वेनम 2: लेट देयर बी कारनेज’, ‘मारबिस’, ‘डोंट ब्रीद 2’, ‘अनचार्टेड’, ‘बुलेट ट्रेन’, ‘मैन फ्रॉम टोरंटो’, ‘रेसिडेंट एविल: वेलकम टू रकून सिटी’, ‘घोस्‍टबस्‍टर्स: आफ्टर लाइफ’, ‘एस्‍केप रूम 2: टूर्नामेंट ऑफ चैंपियंस’ आएंगी। ‘तेरा क्‍या होगा लवली’ में रणदीप हुड्डा और इलियाना डिक्रूज हैं। ‘लूप लपेटा’ में ताहिर राज भसीन और तापसी पन्‍नू हैं। ‘निकम्‍मा’ में भाग्‍यश्री के बेटे वहीं ‘डाइव’ में राम माधवानी। कंपनी के एमडी विवेक कृष्‍णानी ने इसकी पुष्टि की है।

सोनी पिक्‍चर्स हर तरह की ऑडिएंस के लिए फिल्‍में ला रहे हैं

दैनिक भास्‍कर से खास बातचीत में विवेक ने कहा, “हम हर तरह की ऑडिएंस के लिए फिल्‍में ला रहे हैं। वह भी बड़े बजट और बड़े स्टार्स की हॉलीवुड फिल्‍में आ रही हैं। महामारी ने फर्क साफ कर दिया है। आने वाले समय में सिनेमाघरों के लिए बड़े बजट की विजुअल स्‍पेक्‍टेकल वाली फिल्‍में बनेंगी। हॉरर, एक्‍शन, एडवेंचर की हाई कॉन्‍सेप्‍ट वाली फिल्‍में बनेंगी। ओटीटी के लिए तो स्‍लाइस ऑफ लाइफ और सेमी पॉपुलर स्टार्स की फिल्‍में वो बनाएंगे।”

अगर अभी प्रोड्युसर अपनी फिल्में रिलीज करते हैं तो 25 से 30 पर्सेंट का नुकसान तय है

विवेक कृष्‍णानी सिनेमाघरों में आगे आने वाली चुनौतियां भी समझाते हैं। इस बारे में वो कहते हैं, “अब निर्माता तो ज्‍यादा जोर देकर बताना होगा कि फलां फिल्‍म सिनेमाघर में आएंगी। दर्शकों को यह बात उत्‍सवों के दौरान रहने वाले उत्‍साह से बतानी होगी। जैसे ‘मास्‍टर’ के दौरान पोस्‍टर्स तक को दूध से नहलाए जा रहे थे। हालांकि हिंदी प्रोड्युसर इसलिए भी अपनी फिल्‍में नहीं ला रहे हैं कि महाराष्‍ट्र बंद हैं। यानी 25 से 30 पर्सेंट का नुकसान तय है। गणेश चतुर्थी के बाद महाराष्‍ट्र में सिनेमाघरों के खुलने पर फैसला होगा।

हॉलीवुड की फिल्‍मों को महाराष्‍ट्र के सिनेमाघरों के होने न होने से नहीं पड़ता है कोई फर्क

हॉलीवुड की फिल्‍मों को महाराष्‍ट्र के सिनेमाघरों के होने न होने से ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ता। ‘एवेंजर्स’ ने इंडिया में 400 करोड़‍ किया था। ‘जुरैसिक वर्ल्‍ड’ ने 250 करोड़ किया था। यहां चूंकि हॉलीवुड वाले चार से पांच भाषाओं में फिल्‍में रिलीज करते हैं। ऐसे में, उनकी डिपेंडेंसी सिर्फ हिंदी वर्जन पर नहीं हैं। तभी वो महाराष्‍ट्र बंद रहने पर भी रिलीज कर रहें हैं। हिंदी फिल्‍में रिलीज न होने के चलते उनके लिए मैदान भी खाली है।

साउथ की कहानियां कल्‍चर के हिसाब से हैं डीप रूटेड

विवेक हिंदी फिल्‍मों के लिए एक और चुनौती की ओर ध्‍यान आकर्षित करते हैं। वह कहते हैं, “हाल के दिनों में ढेर सारी साउथ की रीमेक अनाउंस हुई हैं। उसकी तादाद आगे और बढ़ने वाली है। साउथ में किस्‍सागोई का तरीका काफी एडवांस्‍ड है। हिंदी सिनेमा में भी ऐसा नहीं है कि कहानियों की कमी है, मगर साउथ के मुकाबले वे कम है। पैंडेमिक के दौर ने सबको सोचने पर मजबूर किया है कि किस तरह फिल्‍मों में नयापन लाया जाए। साउथ की कहानियां कल्‍चर के हिसाब फिल्मों में मिसिंग है।”

विवेक ने किया बजट के पहलू को एक्‍सप्‍लेन

विवेक बजट के पहलू को भी एक्‍सप्‍लेन करते हैं। वो कहते हैं, “रहा सवाल कोविड दौर के चलते फिल्‍म निर्माण के फाइनेंस में गिरावट आने का तो वह सही नहीं है। उसमें और इजाफा हो गया है। वो इसलिए कि अब बेहतर राइटिंग पर ज्‍यादा खर्च करना पड़ रहा है। सिनेमाघरों में दर्शक तभी आएंगे, जब विजुअली खूबसूरत फिल्‍में हों, वरना वो ओटीटी पर ही कुछ न कुछ देख लेंगे। लिहाजा कोविड के दौर ने निर्माताओं की चुनौतियां व उनका बजट सब बढ़ा दिया है।

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