The child used to wet the diaper again and again, thirst and fatigue too, mother learned from Google – this type 1 diabetes, now making people aware | बच्चा बार-बार डायपर गीला करता था, प्यास और थकान भी, मां ने गूगल से जाना- ये टाइप 1 डायबिटीज, अब लोगों को जागरूक कर रहीं


  • Hindi News
  • International
  • The Child Used To Wet The Diaper Again And Again, Thirst And Fatigue Too, Mother Learned From Google This Type 1 Diabetes, Now Making People Aware

कैलिफोर्निया11 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
बचपन और किशोरावस्था में ही टाइप 1 डायबिटीज का पता चल जाता है। इस बीमारी के कारण कम उम्र में ही लोग किडनी और दिल की बीमारी का शिकार हो जाते हैं। - Dainik Bhaskar

बचपन और किशोरावस्था में ही टाइप 1 डायबिटीज का पता चल जाता है। इस बीमारी के कारण कम उम्र में ही लोग किडनी और दिल की बीमारी का शिकार हो जाते हैं।

  • कैलिफोर्निया की कर्टनी मूर ने समय पर लक्षण पहचानकर 16 महीने के बेटे को बचा लिया

बच्चों की सेहत को लेकर यूं तो हर पैरेंट्स जागरूक रहते हैं, लेकिन कैलिफोर्निया की कर्टनी मूर ने अपने 16 महीने के बेटे मैडॉक्स की शारीरिक गतिविधियों को देखते हुए सावधानी नहीं बरती होती तो टाइप 1 डायबिटीज की बीमारी से उसकी जान भी जा सकती थी। दरअसल, कर्टनी ने देखा कि मैडॉक्स बार-बार डायपर गीला करता है और उसे प्यास भी जरूरत से ज्यादा लग रही है। वह बहुत जल्द थक भी जाता है।

कर्टनी ने बेटे मैडॉक्स की इन गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया और पति जैसन को बताया। उन्होंने सोचा कि शायद गर्मी की वजह से ऐसा हो रहा होगा, लेकिन मैडॉक्स का कुछ दूरी तक पहुंच कर ही थक जाना और लगातार वजन घटने से कर्टनी काफी चिंतित हो गई थी। उसने गूगल पर सर्च किया तो पता चला कि ये लक्षण टाइप 1 डायबिटीज के हैं। वह तुरंत मैडॉक्स को लेकर पास के अस्पताल पहुंची।

डॉक्टरों ने बताया कि मैडॉक्स का ब्लड शुगर लेवल 700 के करीब है, जबकि स्वस्थ बच्चे का शुगर लेवल 100 से 180 तक होना चाहिए। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि मैडॉक्स का पैनक्रियाज बहुत कम इंसुलिन बनाता है। डॉक्टरों ने मैडॉक्स को ‘कीटोएसिडोसिस’ नामक जानलेवा डायबिटिक वर्जन से पीड़ित बताया, जो टाइप 1 की श्रेणी में आता है। इससे शरीर न के बराबर इंसुलिन बनाता है जो ब्लड शुगर को एनर्जी में तब्दील नहीं कर रहा है।

हालांकि, दो दिन भर्ती रहने के बाद मैडॉक्स को अस्पताल से छुट्‌टी दे दी गई। अब घर पर ही उसके ब्लड शुगर और इंसुलिन पर निगरानी रखी जा रही है। डॉक्टरों ने बताया कि यह बीमारी ऑटो इम्यून है जिसमें शरीर में ही रिएक्शन होता है, जो पैनक्रियाज में इंसुलिन बनाने वाले सेल्स को ही मारता है। इससे बच्चे के शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और उन्हें अलग से इंसुलिन के डोज देने पड़ते हैं। बचपन और किशोरावस्था में ही टाइप 1 डायबिटीज का पता चल जाता है। इस बीमारी के कारण कम उम्र में ही लोग किडनी और दिल की बीमारी का शिकार हो जाते हैं।

टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित 16 लाख बच्चों के लिए शुरू किया अभियान

जागरूक पैरेंट्स होने के नाते कर्टनी और जेसन ने अपने कर्तव्यों को समझा। बेटे को बचाने के बाद अब वे अमेरिका में टाइप 1 डायबिटीज से प्रभावित 16 लाख बच्चों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए अभियान चला रहे हैं। वे इस बीमारी के लक्षण अन्य पैरेंट्स के साथ साझा कर उन्हें अतिरिक्त जागरूकता बरतने की सलाह के साथ हरसंभव मदद भी कर रहे हैं।

खबरें और भी हैं…



Source link

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RSS
Follow by Email