There is a tradition of sun and moon worship along with pilgrimage on this festival on the full moon 24 of the month of Ashadh. | इस पर्व पर तीर्थ स्नान के साथ सूर्य और चंद्र पूजा की भी परंपरा है


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एक घंटा पहले

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  • आषाढ़ महीने की पूर्णिमा पर जरूरतमंद लोगों को खाना और कपड़ों के दान से मिलता है पुण्य

आषाढ़ महीने की पूर्णिमा 24 जुलाई, शनिवार को है। इस दिन सूर्योदय के वक्त पूर्णिमा तिथि के होने से स्नान-दान, व्रत और गुरु पूजा 24 को ही की जाएगी। इस बार पूर्णिमा तिथि को लेकर पंचांग भेद है। कुछ लोग 23 यानी आज और कुछ 24 को मनाएंगे।

धर्म ग्रंथों में इसे गुरु पर्व भी कहा गया है। शास्त्रों में आषाढ़ पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्नान और दान के साथ ही सूर्य देव को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व बताया गया है। विद्वानों का कहना है कि इस दिन सूर्यदेव की अराधना से मोक्ष मिलता है। इसलिए इस आषाढ़ पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने की परपंरा है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को खाने की चीजें और कपड़ों का दान करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं।

तीर्थ स्नान और सूर्य-चंद्र पूजा
ग्रंथों में कहा गया है कि आषाढ़ पूर्णिमा के मौके पर पवित्र नदियों में नहाने से मोक्ष तो मिलता ही है साथ ही कई तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। लिहाज़ा इस दिन तीर्थों में लोग इकट्‌ठा होते हैं। लेकिन विद्वानों का कहना है कि महामारी के दौर के चलते घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर नहाने से तीर्थ स्नान का पुण्य मिलता है।

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और व्रत करने से पुण्य और मोक्ष मिलता है। विद्वानों के मुताबिक, इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों की पूजा करने का विधान है। सुबह सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना गया है। जबकि शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा कर के व्रत खोलना चाहिए।

सूर्य पूजा: ये पर्व आषाढ़ महीने का आखिरी दिन होता है। आषाढ़ महीने के देवता भगवान सूर्य हैं। इसलिए इस महीने के खत्म होते वक्त सुबह जल्दी उठकर भगवान सूर्य को जल चढ़ाया जाता है। दक्षिणायन के चलते इस दिन उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने से उम्र बढ़ती है और बीमारियां खत्म होती हैं। इस दिन भगवान सूर्य की रवि रूप में पूजा की जाती है।

चंद्रमा पूजा: सूर्य के दक्षिणायन होने के बाद ये पहली पूर्णिमा होती है। पुराणों में बताया गया है कि इस पूर्णिमा पर भी चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होता है साथ ही इस दिन चंद्र को दिया गया अर्घ्य पितरों तक पहुंचता है। जिससे पितृ संतुष्ट होते हैं।

आषाढ़ महीने की पूर्णिमा पर चंद्रमा मकर राशि में होता है। इसलिए इसके प्रभाव से नीरोगी रहते हैं। इस दिन औषधियों को चंद्रमा की रोशनी में रखकर अगले दिन सुबह सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से बीमारियों में राहत मिलने लगती है।

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