This message was written in my father’s coffin – One day I will definitely play in the Olympics, I have fulfilled my promise, now I have no regrets. | पापा के ताबूत में यह संदेश लिखकर रखा था- एक दिन ओलिंपिक में जरूर खेलूंगी, मैंने वादा पूरा किया, अब कोई पछतावा नहीं


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3 मिनट पहलेलेखक: सिंगापुर से भास्कर के लिए वीके संतोष कुमार

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भारतीय मूल की अमिता सिंगापुर से ओलिंपिक में सीधे क्वालिफाई करने वाली पहली फेंसर। - Dainik Bhaskar

भारतीय मूल की अमिता सिंगापुर से ओलिंपिक में सीधे क्वालिफाई करने वाली पहली फेंसर।

2016 में उन्होंने पिता के ताबूत में एक संदेश लिखकर रखा था, जिसमें वादा था कि ‘मैं एक दिन ओलिंपिक में जरूर खेलूंगी। आज ये वादा पूरा कर दिया है।’ ये कहानी है सिंगापुर में भारतीय मूल की फेंसिंग खिलाड़ी अमिता बर्थियर की। वे टोक्यो ओलिंपिक में क्वालिफाई कर चुकी हैं। जूनियर वर्ल्ड चैंपियन रह चुकीं 20 वर्षीय अमिता अमेरिका में पढ़ाई के साथ ट्रेनिंग ले रही हैं। ये कठिन लक्ष्य कैसे पूरा हुआ, पढ़िए उन्हीं की जुबानी…

मां सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम, वे मुझसे जुड़ी हर चीज पर ध्यान देती हैं; परिवार में सब खेल से जुड़े इससे मजबूती मिलती है

ये वादा था, जो मैंने अपने पापा से किया था। उन्होंने कभी भी दबाव नहीं डाला था। यह ऐसा लक्ष्य था जो मैंने खुद के लिए तय किया था, और इस खुशी को पापा के साथ बांटना चाहती थी। यह मेरा उनके लिए तोहफा है। काफी चुनौतीपूर्ण रहा यह सब। पापा के नहीं रहने के बाद पढ़ाई के साथ, ट्रेनिंग और कॉम्पीटिशन की तैयारी, सब में तालमेल बैठाना आसान नहीं था। पर मुझे सिर्फ लक्ष्य दिखता था, मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती थी। मुझे कोई पछतावा नहीं है।

ओलिंपिक में सिंगापुर से सीधे क्वालिफाई करने वाली मैं पहली लड़की हूं। पर मैं जानती हूं कि दुनिया की 60वें नंबर की खिलाड़ी हूं और मेरा सामना ऊंची रैंक वाले और अनुभवी खिलाड़ियों से होगा। हालांकि मैं उत्साहित हूं कि मुझे सर्वश्रेष्ठ फेंसर्स के खिलाफ उतरना होगा। मैं 2016 से ही अमेरिका में 2000 के ओलिंपिक में सिल्वल मेडल विजेता रॉल्फ बिसडार्फ से ‘ट्रेनिंग’ ले रही हूं। गर्मी हो या कड़ाके की ठंड हफ्ते में छह दिन, रोजाना चार घंटे ट्रेनिंग लेती हूं। उसके बाद क्लासेज, फिर कोच के साथ सेशन और इसके बाद टीम ट्रेनिंग होती है।

सिंगापुर में होती हूं, तब कोच जोसेफ एंगर्ट से भी टिप्स लेती हूं। मेरा सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम मां उमा देवी हैं। वो केरल से हैं और मिडल डिस्टेंस रनर रह चुकी हैं। पापा के बाद इस सफर पर उन्हें अकेले ही चलना पड़ा। मैं समझ सकती हूं कि उनके लिए यह कितना कठिन रहा होगा। पर मुझे या बहन को खुश रखने के लिए कभी हार नहीं मानी। 57 साल की उम्र में भी वे मेरे न्यूट्रिशन का ध्यान रखती हैं।

कोच से बात करती हैं, मेरी प्रोग्रेस पर निगरानी रखती हैं। उन्हें पता है कि मुझे भारतीय डिश पसंद हैं, इसके चलते खास मेरे लिए अडा पायसम, मैंगो करी और अवियल भी बनाती हैं। मुझे यह मजबूती परिवार से मिली है। पापा एरिक फ्रांस मूल के थे साथ ही जूडो और फुटबॉल में महारथ रखते थे। मां एथलीट रह चुकी हैं।

भाई अशोक हॉकी और बहन ऐश्वर्या नेटबॉल खिलाड़ी हैं। छोटी बहन आर्या सिंगापुर में नेशनल लेवल की फेंसर हैं। मानसिक शांति के लिए मैं अक्सर सिंगापुर के सेनपगा विनयागर मंदिर जाती हूं। मेरे हाथ में पापा की दी हुई अंगूठी भी है, जो मुझे बार-बार याद दिलाती है कि मुझे टोक्यो में चमकना है। – अमिता

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