You Want To Be Promoted Then You Have To Bring TC – निजी स्कूलों के दबाव में यू-टर्न, आदेश जारी कर हिचकी सरकार, प्रमोट होना है तो टीसी लानी ही पड़ेगी


सरकारी स्कूलों में बच्चों को बिना टीसी अस्थाई प्रवेश देने का आदेश जारी कर राज्य सरकार हिचक रही है। निजी स्कूल संचालकों के दबाव में सरकार अब संशोधित आदेश जारी कर स्थिति ‘स्पष्ट’ करेगी।

विजय शर्मा/जयपुर। सरकारी स्कूलों में बच्चों को बिना टीसी अस्थाई प्रवेश देने का आदेश जारी कर राज्य सरकार हिचक रही है। निजी स्कूल संचालकों के दबाव में सरकार अब संशोधित आदेश जारी कर स्थिति ‘स्पष्ट’ करेगी। इसमें अभिभावकों को 3 माह का समय दिया जाएगा लेकिन टीसी तो लानी होगी। टीसी के बिना बच्चे को पढ़ाया तो जाएगा लेकिन प्रमोट नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि कोरोना काल में जगह-जगह फीस सम्बन्धी विवाद सामने आ रहे हैं। निजी स्कूलों की मनमानी फीस से परेशान अनेक अभिभावक बच्चों का प्रवेश सरकारी स्कूल में करा रहे हैं लेकिन निजी स्कूल टीसी नहीं दे रहे। ऐसे में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा था कि टीसी के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। सरकारी स्कूलों में बिना टीसी अस्थाई प्रवेश देकर पढ़ाया जाएगा। इसका राज्यभर में निजी स्कूल संचालकों ने विरोध शुरू किया तो शिक्षा विभाग अब कदम पीछे खींचते हुए संशोधित आदेश निकालने की तैयारी कर रहा है।

संशोधित आदेश में यह होगा
बच्चों को सरकारी स्कूल में बिना टीसी प्रवेश तो मिलेगा लेकिन टीसी लानी होगी। इसके लिए अधिकतम 3 माह का समय मिलेगा। इसके बाद बच्चा टीसी नहीं ला पाया तो उसे अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा।

फीस विवाद निपटाना होगा
अधिकारियों का तर्क है कि शिक्षा के अधिकार के तहत किसी भी बच्चे को दस्तावेज के अभाव में शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता लेकिन प्रवेश के लिए टीसी जरूरी है। तीन महीने में अभिभावक को निजी स्कूल से फीस विवाद निपटाना होगा।

स्कूल संचालकों को राहत, बच्चों की मुसीबत
संशोधित आदेश के बाद निजी स्कूल संचालकों को तो राहत मिलेगी लेकिन इससे उन बच्चों के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी, जो टीसी नहीं ला पाएंगे। बड़ा सवाल यह है कि तीन महीने बाद उन बच्चों के भविष्य का क्या होगा?

एक सत्र से अधिक का बकाया नहीं मांगें निजी स्कूल: डोटासरा
टीसी विवाद पर शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, हमारी मंशा यह नहीं है कि निजी स्कूल संचालकों और सरकार के बीच संघर्ष हो। यह नियम पहले से है कि टीसी के अभाव में बच्चे की पढ़ाई नहीं रुके। कोरोनाकाल में ऐसे लगभग 2 लाख बच्चे हैं, जो निजी स्कूलों से फीस विवाद के चलते पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। अब स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि बिना टीसी अस्थाई प्रवेश तो लिया जा सकेगा लेकिन बाद में टीसी लेंगे। अभिभावक टीसी लेने पहुंचें तो निजी स्कूल एक सत्र से अधिक का बकाया नहीं मांग सकेंगे। ऐसा नहीं होगा कि टीसी कटवाने पर 5-7 साल पुराना बकाया निकाल दें।

बच्चों को पढ़ाई से वंचित नहीं होने देंगे लेकिन टीसी मिलने पर ही प्रवेश को स्थाई कर सकेंगे। तीन माह का समय देंगे, टीसी नहीं लाने पर बच्चे को प्रमोट नहीं किया जा सकेगा।
सौरभ स्वामी, मा. शिक्षा निदेशक





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